शिंदे गुट को मुंबई में बड़ा झटका, विधायक दिलीप लांडे के बेटे हारे

मुंबई महानगरपालिका की एल वार्ड समिति में गैर-सरकारी सदस्यों के चयन पर शिवसेना के भीतर मतभेद उजागर, बीजेपी पार्षदों ने भी प्रस्ताव का विरोध किया।

राहुल गुप्ता

मुंबई, 23 अक्टूबर। मुंबई महानगरपालिका की एल वार्ड समिति में गैर-सरकारी सदस्यों के चयन को लेकर शिंदे गुट को बड़ा झटका लगा है। शिवसेना के विधायक दिलीप लांडे के बेटे प्रणव लांडे को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। चयन प्रक्रिया का शिवसेना के कुछ सदस्यों के साथ बीजेपी पार्षदों ने भी विरोध किया, जिससे महायुति के भीतर मतभेद सामने आ गए हैं।

एल वार्ड समिति में गैर-सरकारी और संस्थाओं के प्रतिनिधियों के नामांकन के लिए कुल 17 आवेदन मिले थे। दस्तावेजों की जांच के बाद विधायक दिलीप लांडे के बेटे प्रणव लांडे समेत तीन उम्मीदवार पात्र पाए गए। इन तीनों की नियुक्ति का प्रस्ताव समिति की बैठक में मंजूरी के लिए रखा गया, लेकिन कुछ सदस्यों ने इसका विरोध किया। इसके बाद तीनों उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा।

मतदान में प्रस्ताव के खिलाफ पड़े नौ वोट

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चयन प्रक्रिया के दौरान हुए मतदान में 11 सदस्यों ने हिस्सा लिया। इनमें से नौ सदस्यों ने प्रस्ताव के विरोध में मतदान किया, जबकि दो सदस्यों ने इसके पक्ष में वोट दिया। शिवसेना के किरण लांडगे और मीनल तुरडे ने भी चयन प्रक्रिया का विरोध किया।

बीजेपी पार्षद हरीश भांदिर्गे ने भी प्रस्ताव के खिलाफ रुख अपनाया। इस घटनाक्रम से शिवसेना के भीतर आंतरिक मतभेद के साथ ही महायुति में भी मतभेद की चर्चा शुरू हो गई है।

क्या है पूरा मामला?

मुंबई महानगरपालिका की एल वार्ड समिति में सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले तीन नामित सदस्यों की नियुक्ति की जानी थी। इन पदों के लिए 8 मई को विज्ञापन जारी किया गया था। इसके बाद एल वार्ड कार्यालय को कुल 17 आवेदन मिले।

आवेदनों और दस्तावेजों की जांच के बाद प्रणव लांडे समेत तीन उम्मीदवार पात्र पाए गए। उनकी नियुक्ति का प्रस्ताव एल वार्ड समिति की बैठक में पेश किया गया। हालांकि, कुछ सदस्यों ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए इसे रद्द करने की मांग की।

इसके बाद समिति के अध्यक्ष विजेंद्र शिंदे ने मतदान कराने का फैसला लिया। मतदान में प्रस्ताव के खिलाफ नौ और पक्ष में दो वोट पड़े, जबकि दो सदस्य तटस्थ रहे। इस तरह प्रणव लांडे समेत तीनों उम्मीदवारों की नियुक्ति की प्रक्रिया रुक गई। इस घटनाक्रम ने मुंबई महानगरपालिका की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।

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