पार्टी छोड़ने की खबरों को बताया निराधार, नाराजगी की चर्चाओं के बीच कार्यकर्ताओं से संपर्क और बैठकों को लेकर भी रखी अपनी बात
राहुल गुप्ता
मुंबई, 9 अक्टूबर। महाराष्ट्र की राजनीति में पूर्व सांसद गजानन कीर्तिकर के एकनाथ शिंदे की शिवसेना छोड़ने और नाराज होने की चर्चाओं के बीच उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। कीर्तिकर ने कहा कि पार्टी छोड़ने की उनकी कोई इच्छा नहीं है और वह एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में संतुष्ट होकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने टेलीविजन चैनलों पर अपने पार्टी छोड़ने की खबरें देखीं तो उन्हें भी आश्चर्य हुआ। फिलहाल वह गोवा में पार्टी के प्रभारी के रूप में काम कर रहे हैं।
‘पार्टी छोड़ने का कोई इरादा नहीं’
गजानन कीर्तिकर ने कहा कि कांग्रेस के साथ बढ़ती नजदीकी के कारण उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी छोड़ने का फैसला किया था। एकनाथ शिंदे ने जब बगावत की, तब उन्होंने उनका साथ दिया। अब वह शिंदे के नेतृत्व में काम कर रहे हैं और किसी दूसरी पार्टी में जाने की उनकी कोई इच्छा नहीं है।
कीर्तिकर के मुताबिक, एकनाथ शिंदे ने फोन करके उनके बारे में जानकारी ली थी। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि पार्टी छोड़ने की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना महाराष्ट्र में दूसरे नंबर की पार्टी है और वह इसे जल्द ही पहले स्थान पर पहुंचाने के लिए प्रयास कर रहे हैं।
कार्यकर्ताओं से संपर्क में आ रही दिक्कत पर रखी बात
कीर्तिकर ने पार्टी नेतृत्व के साथ बैठक और संपर्क को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी की बैठक नहीं होने पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी, बल्कि अपनी बात रखी थी। पूर्व सांसद होने के नाते उनके पास बीमार और अन्याय से पीड़ित लोग मदद के लिए आते हैं। ऐसे लोगों के काम समय पर कराने के लिए पार्टी नेतृत्व से संपर्क बनाए रखना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि कई बार कुछ मामलों में तुरंत कार्रवाई की जरूरत होती है। ऐसे में बैठक या फोन के जरिए नेतृत्व से बात करनी पड़ती है। एकनाथ शिंदे व्यस्त रहते हैं, इसलिए कभी-कभी संपर्क करने में परेशानी होती है। उन्होंने यह बात शिंदे को बताई थी, जिस पर शिंदे ने व्यवस्था करने का आश्वासन दिया था।
उद्धव ठाकरे की शिवसेना छोड़ने की वजह भी बताई
गजानन कीर्तिकर ने कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना कांग्रेस के करीब होती जा रही थी और पार्टी का मराठी स्वाभिमान कमजोर पड़ रहा था। इसी वजह से उन्होंने पुरानी शिवसेना छोड़ने का फैसला किया था।
उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सहयोगी के रूप में काम करते समय पार्टी नेतृत्व को संगठन के लिए भी समय देना चाहिए। उन्होंने महीने में कम से कम एक बैठक आयोजित करने का सुझाव दिया था, ताकि कार्यकर्ताओं और नेताओं की समस्याओं पर चर्चा हो सके। कीर्तिकर के बयान से स्पष्ट है कि फिलहाल उनका पार्टी छोड़ने का कोई इरादा नहीं है और उनकी प्राथमिकता संगठन के भीतर संवाद बेहतर बनाना है।
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