कर्जमाफी की सूची में नाम, फिर भी राहत का इंतजार! हजारों किसानों के सामने अड़चन

वर्धा जिले में 48,165 किसान पात्र, 14,976 खातों की ई-केवाईसी लंबित; 230.82 करोड़ रुपये मिलने की जानकारी

राहुल गुप्ता

वर्धा, 10 अक्टूबर। महाराष्ट्र के वर्धा जिले में पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर शेतकरी कर्जमुक्ति योजना 2026 के तहत हजारों किसान अब भी कर्जमाफी का इंतजार कर रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, योजना के लिए 48,165 किसानों को पात्र बताया गया है, लेकिन 14,976 खातों की ई-केवाईसी लंबित होने से लाभ वितरण की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। जिले को अब तक 230.82 करोड़ रुपये की कर्जमाफी राशि मिलने की जानकारी है।

हिंगनघाट में सबसे ज्यादा खाते लंबित

जिले में योजना के तहत कुल 74,365 कर्ज खातों का विवरण अपलोड किए जाने की जानकारी दी गई है। इनमें से 14,976 खातों की ई-केवाईसी पूरी होना बाकी है। पात्रता के बावजूद अधूरी प्रक्रिया किसानों को राहत मिलने में बाधा बन रही है।

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तहसीलवार आंकड़ों के अनुसार, हिंगनघाट में सबसे अधिक 2,415 खाते ई-केवाईसी के इंतजार में हैं। इसके बाद देवली में 2,205, समुद्रपुर में 2,150, वर्धा में 1,977 और आर्वी में 1,809 खाते लंबित हैं।

वहीं, आष्टी में 1,557, सेलू में 1,439 और कारंजा में 1,424 खातों की ई-केवाईसी पूरी होना बाकी है। लंबित मामलों को देखते हुए संबंधित तहसीलों में किसानों को प्रक्रिया पूरी करने के लिए मार्गदर्शन उपलब्ध कराना जरूरी है।

230.82 करोड़ रुपये मिले, 23,330 खातों को लाभ

योजना के तहत जिले को अब तक 230.82 करोड़ रुपये की कर्जमाफी राशि प्राप्त होने की जानकारी दी गई है। वहीं, 23,330 खातों को कर्जमाफी का लाभ मिलने की बात सामने आई है।

पात्र किसानों और लाभ प्राप्त करने वाले खातों के आंकड़ों में अंतर होने के कारण शेष लाभार्थियों की स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीकी या दस्तावेज संबंधी अड़चनों के कारण कोई पात्र किसान राहत से वंचित न रह जाए।

42 शिकायतें अब भी लंबित

योजना से संबंधित ऑनलाइन माध्यम से 365 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 332 का निपटारा किया गया, जबकि 33 शिकायतें लंबित हैं। ऑफलाइन माध्यम से प्राप्त 112 शिकायतों के निपटारे की जानकारी दी गई है।

तहसीलवार आंकड़ों के अनुसार, कुल 672 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से 630 का समाधान हुआ, जबकि 42 शिकायतें अब भी लंबित हैं।

योजना का उद्देश्य किसानों को आर्थिक राहत देना है। ऐसे में लंबित ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कराने के साथ शिकायतों का समयबद्ध निपटारा करना भी प्रशासन के लिए अहम है। किसानों को स्पष्ट जानकारी और जरूरी सहायता मिलने से पात्र लाभार्थियों तक राहत पहुंचाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

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