वडापाव बंदी पर बच्चे ने आयुक्त से पूछ लिया ऐसा सवाल, तुकाराम मुंढे ने मुस्कुराते हुए समझाया पूरा गणित!

स्कूलों की कैंटीन में वडापाव की बिक्री पर रोक से नाराज हैं विद्यार्थी, वायरल वीडियो में मुंढे ने बताया सेहत के लिए क्या है जरूरी

राहुल गुप्ता

मुंबई, 10 अक्टूबर। महाराष्ट्र में स्कूलों की कैंटीन और परिसर में वडापाव की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के फैसले से विद्यार्थियों में नाराजगी है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है। हालांकि, विद्यार्थी अपने पसंदीदा वडापाव की बिक्री दोबारा शुरू करने की मांग कर रहे हैं। इसी मुद्दे पर एक छोटे से विद्यार्थी ने मुंढे के सामने सीधे अपनी बात रखी। दोनों के बीच हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

बच्चे ने सीधे पूछा सवाल, मुंढे ने दिया जवाब

विद्यार्थी ने तुकाराम मुंढे से पूछा कि स्कूल में वडापाव की बिक्री पर रोक लगा दी गई है, लेकिन वह और उसके दोस्त चाहते हैं कि इसे दोबारा शुरू किया जाए। इस मांग पर उनका क्या कहना है? बच्चे का सवाल सुनकर मुंढे मुस्कुराते नजर आए। उन्होंने उसे समझाया कि बच्चों को अपने पसंदीदा नाश्ते से आगे बढ़कर भी सोचना चाहिए।

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वडापाव नहीं खाया तो जिंदगी नहीं रुकेगी

मुंढे ने विद्यार्थी को समझाते हुए कहा कि वडापाव नहीं खाने से जिंदगी रुक नहीं जाएगी। इसके बजाय पौष्टिक भोजन करने से शरीर का विकास बेहतर तरीके से हो सकता है। उन्होंने बच्चे को सख्ती से डांटने के बजाय बेहद सहज और नरम अंदाज में सेहत का महत्व समझाया।

उन्होंने यह भी बताया कि बच्चों को रोजाना खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों के बारे में जागरूक करना माता-पिता और स्कूलों के लिए एक चुनौती है। बच्चों को खाने-पीने की अच्छी आदतें समझाना जरूरी है।

तले हुए खाने के बजाय पौष्टिक भोजन की सलाह

मुंढे ने विद्यार्थियों को तली हुई चीजों का सेवन कम करने और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ खाने की सलाह दी। उनके मुताबिक, बच्चों के शारीरिक विकास के लिए संतुलित आहार जरूरी है, जिसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, स्वास्थ्यवर्धक वसा, विटामिन और खनिज शामिल हों।

दालें, फलियां, दूध, दही, अंडे और प्रोटीन से भरपूर अन्य खाद्य पदार्थ शरीर के विकास में मदद करते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि वडापाव खाने से ही बच्चों को नुकसान होता है। असल में यह महत्वपूर्ण है कि बच्चे रोजाना क्या खाते हैं और उनके आहार में पौष्टिक भोजन की कितनी मात्रा होती है।

चाइनीज खाने को लेकर भी किया सावधान

चाइनीज खाने के बारे में सवाल पूछे जाने पर मुंढे ने कुछ खाद्य पदार्थों में कृत्रिम रंगों और रसायनों के इस्तेमाल की आशंका को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्वाद से ज्यादा स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। अगर किसी खाद्य पदार्थ में इस्तेमाल की गई सामग्री के बारे में जानकारी नहीं है, तो उसे लेकर सतर्क रहना जरूरी है।

उन्होंने खाने की गुणवत्ता के साथ-साथ उसे तैयार करने वाली जगह की साफ-सफाई पर भी ध्यान देने की बात कही। बच्चों के साथ तुकाराम मुंढे की यह बातचीत अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

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