सूखे और गिरते भूजल स्तर के बीच अहिल्यानगर में हैंडपंप ग्रामीण आबादी के लिए बड़ा सहारा बने हैं। जिले में 169 टैंकरों से भी पानी की आपूर्ति की जा रही है।
राहुल गुप्ता
अहिल्यानगर, 11 अक्टूबर। महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले में गर्मी और सूखे का असर बढ़ने के साथ भूजल स्तर भी गिरने लगा है। ऐसे में पहले से मौजूद बोरवेल और हैंडपंप ग्रामीण आबादी के लिए राहत का जरिया बने हुए हैं। जिला परिषद के ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अनुसार, जिले में कुल 11,719 हैंडपंप हैं। इनमें से 6,585 हैंडपंपों के माध्यम से 6 लाख से अधिक लोगों को पीने का पानी मिल रहा है। हालांकि, जिले में 1,295 हैंडपंप स्थायी रूप से खराब हैं, जबकि 6,042 हैंडपंप केवल आठ महीने तक ही पानी उपलब्ध करा पाते हैं। वहीं, 1,056 हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं है।
टैंकरों के मुकाबले हैंडपंप पर निर्भर आबादी लगभग दोगुनी
सूखे की गंभीरता बढ़ने के बावजूद फिलहाल भूजल स्तर गिरने के कारण हैंडपंप बंद होने की संख्या में बढ़ोतरी नहीं हुई है। हालांकि, अगले महीने से हैंडपंपों के बंद होने की आशंका जताई जा रही है। वर्तमान में हैंडपंप चालू रहने से कई इलाकों में टैंकरों की जरूरत कम हो रही है। टैंकरों के समय पर नहीं पहुंचने, पर्याप्त फेरे नहीं लगने और रिसाव के कारण पानी की कमी जैसी समस्याओं के बीच हैंडपंप लोगों को राहत दे रहे हैं।
जिले के 161 गांवों और 961 बस्तियों में करीब 3.31 लाख लोगों को 169 टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाया जा रहा है। इसके मुकाबले हैंडपंपों पर निर्भर लोगों की संख्या लगभग दोगुनी है। जिन क्षेत्रों में नल से जलापूर्ति की योजना नहीं है या पानी के स्रोत सूखने से योजनाएं बंद हो गई हैं, वहां करीब 10 लाख लोग टैंकरों और हैंडपंपों पर निर्भर हैं।
जिले में 1,295 हैंडपंप स्थायी रूप से खराब
जिला परिषद के यांत्रिकी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले के 11,719 हैंडपंपों में से 7,641 जिला परिषद के और 2,714 ग्राम पंचायतों के हैं। इनमें 1,295 हैंडपंप स्थायी रूप से बंद हैं। केवल 42 हैंडपंप सालभर चालू रहते हैं, जबकि 6,042 हैंडपंप आठ महीने तक ही पानी देते हैं। इसके अलावा, 1,056 हैंडपंपों का पानी पीने के लिए अनुपयुक्त पाया गया है।
मरम्मत के लिए 14 मोबाइल टीमें तैनात
हैंडपंपों की मरम्मत के लिए जिला परिषद ने तालुका स्तर पर 14 मोबाइल टीमें बनाई हैं। इन टीमों में कुल 36 कर्मचारी हैं। हैंडपंप खराब होने की शिकायत खंड विकास अधिकारी के पास दर्ज कराने के बाद संबंधित टीम मौके पर पहुंचकर मरम्मत करती है। एक टीम प्रतिदिन लगभग दो से तीन हैंडपंपों की मरम्मत करती है।
जिला परिषद ने कर्मचारियों के वेतन के लिए 1.10 करोड़ रुपये, स्पेयर पार्ट्स के लिए 20 लाख रुपये और वाहनों के ईंधन व रखरखाव के लिए 15 लाख रुपये अपने उपकर निधि से आवंटित किए हैं। जिले में सबसे अधिक 1,686 हैंडपंप श्रीगोंदा तालुका में हैं। इसके बाद कर्जत में 1,255 हैंडपंप हैं। सबसे कम 423 हैंडपंप अकोले और 562 हैंडपंप राहुरी में बताए गए हैं।
नई बोरवेल के लिए योजना तैयार करने की प्रक्रिया जारी
जिले में विधायकों की ओर से वर्ष 2017-18 के बाद हैंडपंपों के लिए निधि उपलब्ध नहीं कराई गई है। हालांकि, ग्राम पंचायतों को 15वें वित्त आयोग से हैंडपंपों के लिए सहायता मिल रही है। वर्ष 2019 के बाद से सूखा राहत कार्यक्रम के तहत भी नए हैंडपंप प्रस्तावित नहीं किए गए हैं।
सरकारी निधि से आमतौर पर 70 से 80 फुट गहरी बोरवेल खोदी जाती हैं, जबकि निजी बोरवेल अधिक गहरी होने के कारण सरकारी हैंडपंपों के जलस्रोतों पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के यांत्रिकी विभाग के अनुसार, हैंडपंपों की मरम्मत का काम नियमित रूप से जारी है। भूजल स्तर बढ़ाने के लिए उपाय करना जरूरी है। ग्राम पंचायतों से नई बोरवेल की मांग आने पर योजना लागू की जा सकती है। इसके लिए सूखा राहत कार्ययोजना में बोरवेल से संबंधित उपाय शामिल कर प्रस्ताव को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद इसे मंजूरी के लिए जिलाधिकारी के पास भेजा जाएगा।
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