न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई, 12 अक्टूबर। महाराष्ट्र में सूखे की गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने अगले छह से आठ महीने तक किसानों, खेतिहर मजदूरों और ग्रामीण आबादी को राहत देने की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रोजगार, अनाज, पेयजल और पशुओं के लिए चारा-पानी उपलब्ध कराने पर जोर दिया है। इसके लिए तकनीक और आंकड़ों के आधार पर सूक्ष्म नियोजन किया जा रहा है। रविवार को मुख्यमंत्री ने अपने सरकारी आवास वर्षा में केंद्रीय सूखा निरीक्षण दल के साथ बैठक कर प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति और राहत उपायों पर चर्चा की। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्रीय दल की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार से प्रभावितों को आर्थिक सहायता दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
खरीफ की फसलों को भारी नुकसान
मुख्यमंत्री ने बताया कि मानसून के शुरुआती दो महीनों में अच्छी बारिश से रिकॉर्ड कृषि उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन फसलों में फूल आने के समय करीब दो महीने तक बारिश का अंतराल पड़ गया। इससे सोयाबीन को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, जबकि कपास, अरहर और गन्ने की फसलें भी प्रभावित हुई हैं। पानी की कमी के कारण रबी की बुवाई और ग्रीष्मकालीन फसलों की संभावनाएं भी सीमित हो गई हैं। ऐसे में किसान खरीफ के नुकसान की भरपाई अगली फसलों से नहीं कर पाएंगे। खेती और खेतिहर मजदूरी पर निर्भर ग्रामीण परिवारों के सामने आजीविका का संकट भी गहरा गया है।
अगस्त 2027 तक पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता
फडणवीस ने कहा कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पीने के पानी की उपलब्धता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों को बारिश से कुछ राहत मिली है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में जलस्रोत सूखने लगे हैं। कई गांवों में टैंकरों से पानी पहुंचाने की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए तकनीक आधारित पारदर्शी व्यवस्था तैयार की जा रही है, ताकि गांवों तक योजनाबद्ध तरीके से जलापूर्ति हो सके।
मुख्यमंत्री के अनुसार, अगस्त 2027 तक उपलब्ध पानी में पहला आरक्षण पेयजल के लिए किया गया है। इसमें नागरिकों के साथ पशुओं की जरूरतों का भी ध्यान रखा जाएगा। अन्य उपयोगों के लिए पानी देने से पहले इस आरक्षण का सख्ती से पालन किया जाएगा।
केंद्र से जल्द आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार सूखे से हुए नुकसान का आकलन कर केंद्र के निर्धारित मानकों के अनुसार विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत करेगी। केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ चर्चा के बाद राज्य सरकार अग्रिम ज्ञापन भी भेज चुकी है। केंद्रीय अधिकारियों की तीन टीमों ने अहिल्यानगर, सोलापुर, जालना, बीड, धाराशिव, वाशिम और यवतमाल सहित विभिन्न जिलों के प्रभावित गांवों का दौरा किया। टीमों ने खेतों और जलस्रोतों का निरीक्षण करने के साथ किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं।
बैठक में आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन, कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे, राहत एवं पुनर्वसन मंत्री मकरंद जाधव पाटील तथा केंद्रीय सूखा निरीक्षण दल के प्रमुख एवं केंद्रीय संयुक्त सचिव मुक्तानंद अग्रवाल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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