अपना अस्तित्व बचाने के लिए खुद का मीडिया खड़ा करें वंचित समुदाय: प्रकाश आंबेडकर की अपील,टीवी, अखबारों और राजनीतिक दलों पर उपेक्षा का आरोप
न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई, 12 अक्टूबर। वंचित बहुजन आघाडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट प्रकाश आंबेडकर ने दलितों, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), आदिवासियों और बौद्ध समुदायों की मीडिया में कथित उपेक्षा पर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ महीनों से इन समुदायों को टेलीविजन, अखबारों और राजनीतिक दलों में पर्याप्त स्थान नहीं मिल रहा है। उनके मुताबिक, सार्वजनिक मंचों से इन समुदायों की आवाज और मौजूदगी को दूर रखना भी उन्हें नजरअंदाज करने का एक तरीका है।
‘दिखाई नहीं देंगे तो लोग भूल जाएंगे’
प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि जब किसी समुदाय को मीडिया और सार्वजनिक विमर्श में जगह नहीं मिलती, तो धीरे-धीरे उसकी समस्याएं और मुद्दे भी लोगों की नजरों से दूर हो जाते हैं। उन्होंने दलित, ओबीसी, आदिवासी और बौद्ध समुदायों के लोगों से अपील की कि वे इस स्थिति को महसूस करें और इस पर गंभीरता से विचार करें।
आंदोलन में प्रमुख नेताओं की गैरमौजूदगी पर उठाए सवाल
आंबेडकर ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चले आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दौरान बसपा प्रमुख मायावती और आजाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर आजाद दिखाई नहीं दिए। उन्होंने इस उदाहरण के जरिए वंचित समुदायों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और उनकी आवाज को लेकर सवाल उठाए।
अपना मीडिया बनाने की अपील
वंचित समुदायों के अस्तित्व और अधिकारों की रक्षा के लिए प्रकाश आंबेडकर ने अपना मीडिया खड़ा करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक ये समुदाय अपनी आवाज को प्रभावी ढंग से सामने लाने के लिए स्वतंत्र मंच तैयार नहीं करेंगे, तब तक उनकी समस्याओं और मुद्दों को उचित स्थान मिलना मुश्किल होगा।
उन्होंने समुदायों से अपने अस्तित्व को मजबूत बनाने के लिए लोकतांत्रिक और राजनीतिक माध्यमों के साथ-साथ सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल करने की अपील की। अपने संदेश के अंत में उन्होंने ‘जय भीम, जय संविधान’ का नारा देते हुए वंचित समुदायों से एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करने का आह्वान किया।
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