11 दिनों के आंदोलन के बाद न्यायिक जांच समिति गठित; आयोग में गड़बड़ियों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग।
राहुल गुप्ता
पुणे, 13 अक्टूबर। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षा में पेपर लीक मामले की जांच के लिए न्यायिक जांच समिति गठित की गई है। इस समिति में तुकाराम मुंढे को शामिल किए जाने के बाद अब आयोग की गड़बड़ियों का खुलासा होने की उम्मीद विधायक रोहित पवार ने जताई है। उन्होंने कहा कि जिस तरह मुंढे ने खाद्य पदार्थों में मिलावट का पता लगाकर कार्रवाई की थी, उसी तरह अब उन्हें आयोग में व्याप्त गड़बड़ियों का पता लगाने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
एमपीएससी के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग को लेकर पुणे के नवी पेठ स्थित एस. एम. जोशी पुल के पास 11 दिनों तक आंदोलन चला। न्यायिक जांच समिति के गठन, उसमें तुकाराम मुंढे को सचिव के रूप में शामिल करने और जांच के दौरान भीमनवार के छुट्टी पर जाने की घोषणा के बाद रविवार आधी रात को आंदोलन समाप्त कर दिया गया। इसके बाद सोमवार को रोहित पवार ने पत्रकारों से बातचीत की।
छात्रों की एकजुटता से आंदोलन सफल
रोहित पवार ने कहा कि यदि एमपीएससी अध्यक्ष को पद से हटाने की प्रक्रिया में दो से तीन महीने लग जाते, तो परीक्षाओं में देरी होती और छात्रों का नुकसान होता। छात्रों को न्याय दिलाना जरूरी था। आंदोलन का उद्देश्य राजनीतिक लाभ लेना नहीं था। उन्होंने दावा किया कि छात्रों की एकजुटता के कारण आंदोलन सफल हुआ।
पवार के मुताबिक, अध्यक्ष का इस्तीफा छात्रों की मांग थी। हालांकि, छात्रों को स्थिति समझाने के बाद वे सहमत हो गए और उन्होंने जश्न मनाया। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान पुलिस का दबाव था और मौके पर 3,000 पुलिसकर्मी तैनात थे, लेकिन किसी भी छात्र के साथ कार्रवाई नहीं की गई। छात्रों को अपनी मांगों के लिए आंदोलन करने का अधिकार है और उनके आंदोलन का समर्थन किया जाएगा।
सभी मौजूदा और पूर्व अध्यक्षों की होगी जांच
पवार ने बताया कि राज्य के मुख्य सचिव के हस्ताक्षर वाला पत्र राज्य सरकार के एक मंत्री के हाथों दिया गया है। उनके अनुसार, 1952 के कानून के तहत जांच समिति गठित की गई है। इसमें एमपीएससी के मौजूदा और पूर्व अध्यक्षों के साथ सभी मौजूदा और पूर्व सदस्यों की भी जांच की जाएगी।
उन्होंने कहा कि जांच केवल औषधि निरीक्षक परीक्षा के पेपर लीक मामले तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अन्य संदिग्ध परीक्षाओं की भी जांच होगी। जांच से जुड़ी मांगों का पत्र न्यायिक जांच समिति के अध्यक्ष को भी सौंपा जाएगा।
‘मुंढे को अधिकार नहीं मिले तो सरकार को महंगा पड़ेगा’
रोहित पवार ने चेतावनी दी कि यदि जांच समिति में तुकाराम मुंढे को अधिकार नहीं दिए जाने की बात सामने आती है, तो सरकार को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि एमपीएससी से जुड़े हलकों में पहले मुंढे का नाम चर्चा में नहीं था, लेकिन लगातार उनका नाम आगे लाकर उन्हें समिति में शामिल करना एक रणनीति का हिस्सा रहा।
पवार ने उम्मीद जताई कि मुंढे के समिति में शामिल होने से जांच सही तरीके से होगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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