तीन वर्षों में 1,200 महानगरपालिका स्कूलों को अभियान से जोड़ने का लक्ष्य; मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहल पर बीएमसी और विजन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की संयुक्त योजना
न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई, 13 अक्टूबर। कक्षा में पहली बेंच पर बैठने के बावजूद ब्लैकबोर्ड पर लिखा स्पष्ट दिखाई नहीं देना, पढ़ने में परेशानी होना या पढ़ाई में पीछे रह जाना—बच्चों की इन समस्याओं के पीछे कई बार आंखों की कमजोरी होती है। समय पर पहचान नहीं होने के कारण ऐसे विद्यार्थियों को लापरवाह या पढ़ाई में कमजोर समझ लिया जाता है। इसी समस्या को दूर करने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) और विजन फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहल पर ‘बाल दृष्टि’ अभियान शुरू किया है। इसके तहत तीन वर्षों में महानगरपालिका के 1,200 स्कूलों के तीन लाख विद्यार्थियों की आंखों की जांच करने का लक्ष्य रखा गया है।
बच्चों में दृष्टिदोष की समय पर पहचान पर जोर
‘बाल दृष्टि’ अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों में अपवर्तन दोष (रिफ्रैक्टिव एरर) की पहचान कर उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराना है। यह अभियान आयुष्मान भारत के अंतर्गत स्कूल स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रम से जुड़ा है।
आंखों से संबंधित परेशानी होने पर बच्चे हमेशा अपनी समस्या बता नहीं पाते। कई बार वे ब्लैकबोर्ड के पास बैठने की कोशिश करते हैं, पढ़ने से बचते हैं या बोर्ड पर लिखे शब्दों को धीरे-धीरे कॉपी करते हैं। इन संकेतों को अक्सर पढ़ाई में अरुचि या ध्यान की कमी समझ लिया जाता है। अभियान के माध्यम से ऐसे लक्षणों की पहचान कर विद्यार्थियों को उचित नेत्र उपचार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
देश में करीब 93 लाख बच्चों के दृष्टिबाधित होने का उल्लेख
अभियान से संबंधित जानकारी के अनुसार, देश में लगभग 93 लाख बच्चे दृष्टिबाधित हैं। ‘इंडियन जर्नल ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी’ में प्रकाशित वर्ष 2022 के एक अध्ययन के मुताबिक, बाल अंधत्व के कारण भारत के सकल राष्ट्रीय उत्पाद को अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 1,300 करोड़ रुपये का नुकसान होता है।
अपवर्तन दोष और एम्ब्लायोपिया (आलसी आंख) बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्याओं के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 75 प्रतिशत से अधिक दृष्टिदोष को रोका जा सकता है या उचित उपचार से उसमें सुधार किया जा सकता है।
227 स्कूलों के 40,270 विद्यार्थियों की जांच
फरवरी से सितंबर 2026 के बीच ‘बाल दृष्टि’ अभियान के तहत बीएमसी के 227 स्कूलों के 40,270 विद्यार्थियों की आंखों की जांच की गई। इन स्कूलों में कुल 59,150 विद्यार्थी नामांकित थे। इस प्रकार लगभग 68 प्रतिशत विद्यार्थियों तक जांच की सुविधा पहुंची।
जांच कराने वालों में 20,390 लड़के और 19,880 लड़कियां शामिल थीं। जांच के दौरान कुछ विद्यार्थियों में गंभीर दृष्टिदोष भी सामने आए। एक विद्यार्थी की एक आंख में माइनस 11.50 एसपीएच का निकट दृष्टिदोष पाया गया, जबकि कुछ विद्यार्थियों में यह माइनस 16 एसपीएच तक दर्ज किया गया। एक विद्यार्थी में मोतियाबिंद का भी पता चला।
इन मामलों से स्पष्ट हुआ कि कई बच्चों की आंखों की गंभीर समस्याएं घर या स्कूल में पहले पहचान में नहीं आ पाई थीं।
361 बच्चों को चश्मे, चार की तिरछी आंखों की सर्जरी
अभियान के तहत अब तक 361 विद्यार्थियों को चश्मे दिए जा चुके हैं। जिन बच्चों में नेत्र विकार की आशंका पाई जाती है, उन्हें ताड़देव रोड स्थित विजन फाउंडेशन ऑफ इंडिया के कम्युनिटी आई क्लिनिक में विस्तृत जांच के लिए भेजा जाता है। जांच के बाद चश्मे, विशेषज्ञ उपचार या सर्जरी की जरूरत तय की जाती है।
अभियान के अंतर्गत अब तक चार विद्यार्थियों की तिरछी आंखों (भेंगापन) की सर्जरी की गई है। उपचार पूरा होने तक बच्चों के अभिभावकों से घर और स्कूल के माध्यम से संपर्क बनाए रखकर नियमित रूप से जानकारी ली जाती है।
रंगों की पहचान में कठिनाई वाले 31 विद्यार्थी मिले
जांच के दौरान 31 विद्यार्थियों में रंग दृष्टिदोष पाया गया। इस समस्या को ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन समय पर इसकी पहचान होने से शिक्षकों और अभिभावकों को बच्चों की जरूरत के अनुसार पढ़ाने और समझाने के तरीके में बदलाव करने में मदद मिलती है। इससे आगे की पढ़ाई और करियर के विकल्प चुनने में भी उचित मार्गदर्शन दिया जा सकता है।
सर्जरी के बाद वेदांत को अब स्पष्ट दिखता है ब्लैकबोर्ड
अभियान का सकारात्मक उदाहरण लोअर परेल स्थित गणपतराव कदम महानगरपालिका स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ने वाला नौ वर्षीय वेदांत नेरुलकर है। उसे पहली बेंच पर बैठने के बावजूद ब्लैकबोर्ड पर लिखा दिखाई नहीं देता था। तिरछी आंखों की समस्या के कारण उसे पाठ समझने में भी परेशानी होती थी और वह कक्षा में कम बोलता था।
‘बाल दृष्टि’ अभियान के दौरान उसकी समस्या की पहचान हुई और जुलाई में उसकी मुफ्त सर्जरी की गई। सर्जरी के बाद अब वह ब्लैकबोर्ड पर लिखा पढ़ पा रहा है और पाठ समझकर सवालों के जवाब भी दे रहा है। उसकी मां के अनुसार, अब उनका बेटा स्पष्ट देख पा रहा है और आत्मविश्वास के साथ पढ़ाई करने के अलावा अपने दोस्तों के साथ भी सहजता से घुल-मिल रहा है।
1,950 बच्चों को आगे की जांच के लिए भेजा गया
अभियान के तहत आगे के उपचार के लिए भेजे गए 1,950 विद्यार्थियों में से अब तक 549 विद्यार्थी, यानी लगभग 28 प्रतिशत, संबंधित क्लिनिक तक पहुंचे हैं। अब प्रत्येक विद्यार्थी की स्कूल में प्रारंभिक पहचान से लेकर विशेषज्ञ जांच, चश्मा वितरण और उपचार पूरा होने तक निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विद्यार्थियों की जांच,उपचार के लिए रेफरल और घर-घर जाकर संपर्क बनाए रखने के कार्य में जुटी बीएमसी तथा विजन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की टीमों के प्रयासों की सराहना की है। अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दृष्टिदोष के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो और उसे समय पर आवश्यक नेत्र सेवाएं मिल सकें।
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