नासिक के अंबड औद्योगिक क्षेत्र के पास लिए गए नमूनों में जहरीले हेक्सावेलेंट क्रोमियम की मात्रा भी बेहद अधिक मिली; प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर कार्रवाई के निर्देश।
राहुल गुप्ता
नासिक, 13 अक्टूबर। वर्ष 2027 में होने वाले कुंभ मेले की तैयारियों के बीच नासिक के अंबड औद्योगिक क्षेत्र के पास नदी के पानी में खतरनाक रासायनिक प्रदूषण का मामला सामने आया है। प्रयोगशाला की जांच में पानी के नमूनों में क्रोमियम की मात्रा पीने के पानी में निर्धारित स्वीकार्य सीमा से 1,000 गुना से भी अधिक पाई गई। इसके बाद राज्य सरकार ने प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
प्रयोगशाला रिपोर्ट के अनुसार, पानी में कुल क्रोमियम की मात्रा 50.5 मिलीग्राम प्रति लीटर मिली, जिसमें 50.3 मिलीग्राम प्रति लीटर अत्यधिक जहरीला हेक्सावेलेंट क्रोमियम शामिल है। भारतीय मानक ब्यूरो के अनुसार, पीने के पानी में क्रोमियम की स्वीकार्य सीमा 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर है। यह रिपोर्ट ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने प्राप्त की है।
गोदावरी में मिलने वाली नदी के पानी पर चिंता
पानी के नमूने नासिक के अंबड औद्योगिक क्षेत्र के पास नंदिनी नदी तंत्र से लिए गए थे। नंदिनी नदी आगे गोदावरी में मिलती है। ऐसे में औद्योगिक प्रदूषण के गोदावरी तक पहुंचने की आशंका ने चिंता बढ़ा दी है। वर्ष 2027 के कुंभ मेले के दौरान गोदावरी के घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। इस दौरान पवित्र स्नान के लिए पानी की गुणवत्ता महत्वपूर्ण होगी।
गुरुवार को कुंभ मेले की तैयारियों की निगरानी कर रहे राज्य के मंत्री गिरीश महाजन ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने इस रिपोर्ट के बारे में पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री पंकजा मुंडे से बातचीत की। मुंडे के कार्यालय के एक अधिकारी के अनुसार, उन्होंने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ तत्काल उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
शिकायतों के बाद लिए गए पानी के नमूने
नासिक के पर्यावरण कार्यकर्ता राजेश पंडित ने बताया कि वह एक दशक से अधिक समय से नदी के पुनर्जीवन और जल प्रदूषण के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। उनके अनुसार, अंबड क्षेत्र के कई निवासियों ने शिकायत की थी कि उनके घरों के बोरवेल से पीले रंग का पानी आ रहा है।
इन शिकायतों के बाद राजेश पंडित और दक्षिण एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल (एसएएनडीआरपी) की परिनीता दांडेकर ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया और जांच के लिए पानी के नमूने एकत्र किए। इन नमूनों की जांच 3 अक्टूबर को निजी प्रयोगशाला अश्वमेध इंजीनियर्स एंड कंसल्टेंट्स में की गई। रिपोर्ट मिलने के बाद दांडेकर ने जांच के निष्कर्ष सरकारी अधिकारियों के साथ साझा किए, जिसके बाद महाजन ने इस मामले को पंकजा मुंडे के सामने उठाया।
जहरीले क्रोमियम से स्वास्थ्य को गंभीर खतरा
हेक्सावेलेंट क्रोमियम को कैंसरकारी पदार्थ माना जाता है। इसके संपर्क में आने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, आसपास के भूजल में प्रदूषण कितना फैल चुका है और स्थानीय निवासियों पर इसका कितना असर पड़ा है, यह जानने के लिए विस्तृत जांच की आवश्यकता है।
राजेश पंडित के अनुसार, स्थानीय निवासियों ने त्वचा संबंधी समस्याओं और अन्य बीमारियों की शिकायत की है। उन्होंने रासायनिक घाव, चकत्ते, छाले, लिम्फ नोड्स में सूजन और लंबे समय से चली आ रही बीमारियों के मामलों का भी उल्लेख किया। पंडित ने दावा किया कि प्रभावित बस्ती की 2 महिलाओं ने गर्भपात होने की जानकारी दी थी। इन स्वास्थ्य समस्याओं का प्रदूषित पानी से संबंध स्थापित करने के लिए स्वतंत्र चिकित्सकीय जांच जरूरी होगी।
पंडित ने कहा कि नासिक नगर निगम की ओर से पानी की आपूर्ति कम और अनियमित होने के कारण कई परिवार नहाने, कपड़े धोने और बर्तन साफ करने जैसे दैनिक कामों के लिए इसी पानी पर निर्भर हैं।
भूजल प्रदूषण की सीमा का पता लगाना जरूरी
पंडित ने आरोप लगाया कि अधिकृत औद्योगिक इकाइयों के साथ-साथ अवैध रूप से संचालित कुछ इकाइयां भी बिना उपचार किए गंदे पानी को खुले में छोड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि भूजल में प्रदूषण किस सीमा तक फैला है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इसके लिए विस्तृत अध्ययन कराया जाना चाहिए, ताकि प्रदूषण के फैलाव और उसके प्रभाव का सही आकलन किया जा सके।
पढ़ने के लिए धन्यवाद
आपका समय और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। अगर यह खबर आपके लिए उपयोगी रही, तो हमसे जुड़े रहें — हर ज़रूरी खबर के लिए Newsam को फ़ॉलो करें।