मंत्रिमंडल की बैठक में एकनाथ शिंदे की गैरमौजूदगी पर चर्चा तेज; संजय राउत ने मोदी सरकार के भविष्य को लेकर दावा किया।
राहुल गुप्ता
मुंबई, 13 अक्टूबर। महाराष्ट्र की राजनीति में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की नाराजगी की चर्चाओं से लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर संजय राउत के बयान तक, कई मुद्दों पर सियासी हलचल तेज है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में मुंबई में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में शिंदे शामिल नहीं हुए, जिसके बाद उनकी नाराजगी को लेकर अटकलें लगने लगीं। वहीं, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने दावा किया कि मोदी सरकार को अगले 6 महीनों में दिल्ली से अपना बोरिया-बिस्तर समेटना पड़ सकता है।
‘शिंदे नाराज हुए तो बदल सकती है सरकार’
मंत्रिमंडल की बैठक में एकनाथ शिंदे की गैरमौजूदगी के बाद राजनीतिक गलियारों में उनकी नाराजगी की चर्चा शुरू हो गई। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शिंदे गुट के विधायक बच्चू कडू ने कहा कि एकनाथ शिंदे आसानी से नाराज होने वाले नेता नहीं हैं। उन्होंने संकेत देते हुए कहा कि अगर शिंदे नाराज हो गए, तो सरकार बदल सकती है और राजनीतिक भूकंप आ सकता है। इसलिए किसी को उन्हें नाराज नहीं करना चाहिए।
दूसरी ओर, मंत्री उदय सामंत ने नाराजगी की अटकलों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे के शब्दकोश में ‘नाराजगी’ शब्द नहीं है और वे जो भी करते हैं, खुले दिल से करते हैं। दोनों नेताओं के बयानों के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
‘मोदी सरकार को 6 महीने में जाना पड़ सकता है’
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने दावा किया कि केंद्र की मोदी सरकार को अगले 6 महीनों में सत्ता छोड़नी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी को भी आंदोलन करने से नहीं रोका जा सकता। राउत ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने आंदोलनों पर रोक लगाने की कोशिश की, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्तीफा देना पड़ सकता है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा कई लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए जाने पर भी राउत ने नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज करके क्या सरकार को अपनी कार्रवाई पर गर्व हो रहा है।
राउत ने दावा किया कि मुंबई में आंदोलन करने के मामले में विधायक आदित्य ठाकरे, अमित ठाकरे और वरुण सरदेसाई के खिलाफ भी मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि नेताओं को मुकदमों का डर दिखाने का समय अब खत्म हो रहा है और केंद्र सरकार को अगले 6 महीनों में दिल्ली से जाना पड़ सकता है। उनके इस बयान पर राजनीतिक और सोशल मीडिया हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
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