SIR रद्द करें, चुनाव आयोग पर जनता का अविश्वास; युवाओं में मतदाता पंजीकरण के प्रति ठंडी प्रतिक्रिया: हर्षवर्धन सपकाल

न्यूज़म ब्यूरो

मुंबई, 14 अक्टूबर। चुनाव आयोग द्वारा शुरू किया गया एसआईआर (SIR) अभियान शुरुआत से ही बेहद जटिल और समय खींचने वाला साबित हुआ है। आयोग के कामकाज के तरीके को देखते हुए मतदाताओं ने इस अभियान से ही दूरी बना ली है। महाराष्ट्र की जनता ने भी चुनाव आयोग के प्रति अविश्वास जताया है और युवाओं ने मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने से मुंह मोड़ लिया है। इसलिए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया रद्द की जानी चाहिए। यह मांग महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने की है।

इस संबंध में प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव आयोग ने 14 मई 2026 को एसआईआर अभियान की घोषणा की थी। महाराष्ट्र में 30 जून 2026 से 29 जुलाई 2026 तक बूथ स्तरीय अधिकारियों (BLO) द्वारा घर-घर जाकर गणना प्रपत्र भरवाए जाने और 5 अगस्त 2026 को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित किए जाने की घोषणा की गई थी। इस समयसीमा को दो बार बढ़ाया जा चुका है और अब दावे एवं आपत्तियां दर्ज कराने की समयसीमा भी फिर से बढ़ा दी गई है। प्रारूप मतदाता सूची 31 अगस्त 2026 को प्रकाशित की गई।

उन्होंने कहा कि गणना प्रपत्र भरने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही 7 लाख 90 हजार मतदाताओं के नाम हटा दिए गए थे। गणना प्रपत्र भरने के बाद 2 करोड़ 6 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। इनमें मृत और दोहरे मतदाताओं को छोड़कर 1 करोड़ 54 लाख मतदाता ऐसे हैं, जिनके नाम अनुपस्थित, स्थानांतरित या अन्य कारणों का हवाला देकर हटाए गए हैं।

जनता में बढ़ते असंतोष को देखते हुए दोबारा फॉर्म-6 भरने की अनुमति दी गई है। इससे स्पष्ट होता है कि 1 करोड़ 54 लाख मतदाताओं के नाम बिना किसी ठोस तथ्य के सूची से हटाए गए। अक्टूबर 2024 से 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके 40 लाख युवाओं का मतदाता के रूप में पंजीकरण नहीं हुआ है। इन 1 करोड़ 94 लाख लोगों में से अब तक केवल 8 लाख 33 हजार नागरिकों ने ही फॉर्म-6 भरा है।

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हर्षवर्धन सपकाल ने आगे कहा कि प्रारूप मतदाता सूची में शामिल 1 करोड़ 22 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी कर सबूत प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। भारतीय जनता पार्टी के लिए काम करने वाले चुनाव आयोग की अनियमितताएं अब उजागर हो चुकी हैं। देशभर में वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन जारी हैं।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जनता में असंतोष लगातार बढ़ रहा है और चुनाव आयोग पर लोगों का विश्वास खत्म हो चुका है।

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