सुची शुक्ला
मुंबई, 14 अक्टूबर। बच्चों को इंटरनेट की दुनिया में सुरक्षित रहने और ऑनलाइन खतरों को पहचानने के प्रति जागरूक करने के लिए साइबर सुरक्षा कंपनी कैस्परस्की ने किडजानिया इंडिया के साथ मिलकर मुंबई में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। घाटकोपर स्थित आर सिटी मॉल के किडजानिया में आयोजित इस मीडिया फैमिली डे में बच्चों और उनके अभिभावकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करना था।
यह आयोजन दिल्ली-एनसीआर में 6 अक्टूबर को आयोजित इसी तरह के कार्यक्रम के बाद किया गया। मुंबई में कैस्परस्की और किडजानिया का साइबर इन्वेस्टिगेशन सेंटर अप्रैल 2026 में शुरू हुआ था। यहां बच्चों को साइबर जांचकर्ता की भूमिका निभाते हुए इंटरनेट पर होने वाले अपराधों को समझने और उनसे बचने के तरीके सीखने का अवसर मिलता है।
साइबर इन्वेस्टिगेशन सेंटर में बच्चों ने कैस्परस्की के सुरक्षा सॉफ्टवेयर से लैस कंप्यूटरों पर विभिन्न मामलों को हल किया। इनमें फिशिंग, पहचान की चोरी और साइबर बुलिंग जैसे खतरे शामिल थे। इन गतिविधियों के जरिए बच्चों को संदिग्ध लिंक पहचानने, सुरक्षित तरीके से इंटरनेट का इस्तेमाल करने और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के उपाय बताए गए। प्रत्येक सत्र 20 मिनट का होता है, जिसमें एक बार में अधिकतम छह बच्चे भाग ले सकते हैं। सफलतापूर्वक मामला हल करने वाले बच्चों को किडजॉस और व्यक्तिगत साइबर इन्वेस्टिगेटर कार्ड दिया जाता है।
कैस्परस्की के दक्षिण एशिया में उपभोक्ता कारोबार प्रमुख पुरुषोत्तम भाटिया ने कहा कि साइबर सुरक्षा के बारे में बच्चों और अभिभावकों को एक साथ जागरूक करना जरूरी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के बीच बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षा की जानकारी देना और भी महत्वपूर्ण हो गया है। वहीं, किडजानिया इंडिया के मुख्य व्यवसाय अधिकारी तरनदीप सिंह सेखों ने कहा कि बच्चे गतिविधियों के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से सीखते हैं। इस केंद्र में उन्हें वास्तविक परिस्थितियों जैसी गतिविधियों के जरिए इंटरनेट पर मौजूद खतरों को समझने का मौका मिलता है।
कैस्परस्की के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 2026 की पहली छमाही के दौरान बच्चों के सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले 20 ऐप में चैटजीपीटी सातवें स्थान पर रहा। कंपनी की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बच्चों की इंटरनेट खोजों में एआई से जुड़े ऐप और सेवाएं तेजी से लोकप्रिय हुई हैं। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के ऑनलाइन व्यवहार पर ध्यान देने, मोबाइल फोन में सुरक्षा संबंधी नियंत्रण लागू करने और एआई से मिलने वाली जानकारी की सत्यता जांचने की आदत विकसित कराने की सलाह दी गई।
कैस्परस्की ने अभिभावकों को बच्चों से इंटरनेट के इस्तेमाल के बारे में नियमित बातचीत करने, निजी जानकारी ऑनलाइन साझा न करने और संदिग्ध संदेशों व लिंक से सावधान रहने की सलाह दी। कंपनी और किडजानिया की इस पहल का उद्देश्य बच्चों और परिवारों में साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाना है।
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