एमपीएससी के मुद्दे पर दोबारा राजनीति करने का आरोप; नए सबूत हैं तो न्यायिक जांच और एसआईटी को सौंपें
न्यूज़म ब्यूरो
पुणे, 15 अक्टूबर। महाराष्ट्र में एमपीएससी (महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग) से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। भाजपा विधायक विक्रम बबनराव पाचपुते ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की नेता सुषमा अंधारे पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह पुराने मुद्दों को दोबारा उठाकर राजनीतिक माहौल गरमाने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सुषमा अंधारे राजनीतिक रूप से बेरोजगार हो गई हैं और इसी वजह से ‘बासी कढ़ी में उबाल’ लाने का प्रयास कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के प्रतिनिधियों से की है चर्चा
विधायक पाचपुते ने कहा कि सुषमा अंधारे ने उन्हें अध्ययनशील विधायक माना, इसके लिए वह उनके आभारी हैं। हालांकि, उनके बयानों का अध्ययन करने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि पुराने विषयों को फिर से उठाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि एमपीएससी से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर पहले भी विस्तार से चर्चा हो चुकी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विद्यार्थियों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की है और उनके द्वारा उठाए गए सवालों पर कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू है। ऐसे में उन्हीं मुद्दों को बार-बार उठाकर राजनीतिक माहौल गर्म करने के बजाय समाधान पर ध्यान देना चाहिए।
सबूत हैं तो न्यायिक जांच और एसआईटी को सौंपें
पाचपुते ने सुषमा अंधारे से कहा कि यदि उनके पास एमपीएससी से जुड़े मामलों में कोई नए और ठोस सबूत हैं, तो उन्हें संबंधित न्यायिक जांच के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने बताया कि पेपर लीक मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) भी गठित किया गया है, जिसके पास स्वतंत्र जांच तंत्र और अपराधों की पड़ताल करने की क्षमता है।
उन्होंने कहा कि केवल पत्रकार परिषद आयोजित कर आरोप लगाने के बजाय ठोस सबूत जांच एजेंसियों को सौंपना अधिक उचित होगा, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।
‘अर्बन नक्सल’ बयान का गलत अर्थ निकाला गया
सुषमा अंधारे की ओर से पत्रकार परिषद में अधूरा वीडियो दिखाए जाने के कारण गलतफहमी पैदा होने के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए पाचपुते ने कहा कि जिस तरह उनके अधूरे बयान से गलतफहमी पैदा हुई, उसी तरह उनके बयान का भी कुछ लोगों ने जानबूझकर गलत अर्थ निकाला है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पूरी पत्रकार परिषद और संबंधित वीडियो उनके सभी सोशल मीडिया अकाउंट पर उपलब्ध हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने एमपीएससी के विद्यार्थियों को ‘अर्बन नक्सल’ नहीं कहा था।
पाचपुते के अनुसार, उनका सवाल यह था कि क्या रोहित पवार एमपीएससी के विद्यार्थियों की आड़ में ‘अर्बन नक्सल’ तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि यह सवाल के रूप में व्यक्त की गई आशंका थी, न कि विद्यार्थियों पर लगाया गया कोई आरोप। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह आज भी अपनी मूल भूमिका पर कायम हैं।
विद्यार्थियों के भविष्य पर राजनीति नहीं होनी चाहिए
विधायक पाचपुते ने कहा कि एमपीएससी के विद्यार्थियों से जुड़े सवाल गंभीर हैं और उनका समाधान निकालना आवश्यक है। इन मामलों में विश्वसनीय जांच और उचित कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों का भरोसा कायम रहे।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को बार-बार राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और प्रचार का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। इसके बजाय संबंधित समस्याओं के समाधान और जांच की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
‘सच्चाई सामने आने पर जनता को भूमिका समझ आएगी’
अपने बयान के अंत में पाचपुते ने कहा कि उनके शब्दों का गलत अर्थ निकालने के कई प्रयास किए गए हैं, लेकिन सच्चाई कभी छिपी नहीं रहती। उन्होंने कहा कि जब उनका पूरा बयान जनता के सामने आएगा, तो लोगों को उनकी वास्तविक भूमिका और वक्तव्य का संदर्भ स्पष्ट हो जाएगा।
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