महावितरण को राष्ट्रीय ऊर्जा परिषद में सात पुरस्कार, देश में हासिल किया पहला स्थान

हरित ऊर्जा और कार्य प्रदर्शन में अव्वल; 2030 तक हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी 52 प्रतिशत करने का लक्ष्य

न्यूज़म ब्यूरो

मुंबई, 15 अक्टूबर। महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (महावितरण) ने आधुनिक तकनीक, हरित ऊर्जा और ग्राहक सेवाओं में सुधार के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नई दिल्ली में आयोजित 20वीं राष्ट्रीय ऊर्जा परिषद में महावितरण को सात पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। कंपनी ने ‘भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार बिजली वितरण कंपनी’ (फ्यूचरिस्टिक डिस्कॉम) श्रेणी में देश में पहला स्थान प्राप्त किया। महावितरण के निदेशक (संचालन) धनंजय औंढेकर ने 14 अक्टूबर को ये पुरस्कार स्वीकार किए।

हरित ऊर्जा और कार्य प्रदर्शन में पहला स्थान

इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से 13 और 14 अक्टूबर को आयोजित परिषद में महावितरण ने हरित ऊर्जा और कार्य प्रदर्शन में सुधार की श्रेणियों में पहला स्थान हासिल किया। सेवाओं की गुणवत्ता एवं ग्राहक सशक्तीकरण में दूसरा, जबकि कुशल संचालन और तकनीक के उपयोग में तीसरा स्थान प्राप्त किया। प्रभावशाली नवाचार के लिए भी कंपनी को विशेष सम्मान मिला, जो सेवानिवृत्त केंद्रीय ऊर्जा सचिव अनिल राजदान ने प्रदान किया।

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2030 तक हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी 52 प्रतिशत

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन, ऊर्जा विभाग की अपर मुख्य सचिव आभा शुक्ला के नेतृत्व तथा महावितरण के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक लोकेश चंद्र के निर्देशन में बिजली क्षेत्र में सुधार किए जा रहे हैं। राज्य की रिसोर्स एडिक्वेसी योजना के तहत 38 हजार मेगावाट से अधिक हरित ऊर्जा क्षमता जोड़ने की योजना है। इससे 2030 तक महावितरण की हरित ऊर्जा हिस्सेदारी 13 प्रतिशत से बढ़कर 52 प्रतिशत होने की उम्मीद है। कंपनी के अनुसार, 2025 से 2030 की अवधि के लिए बहुवर्षीय बिजली दरों में 26 प्रतिशत तक की कटौती घोषित की गई है।

सौर योजनाओं से किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को लाभ

मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 के तहत 16 हजार मेगावाट विकेंद्रित सौर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। अब तक 6,600 मेगावाट की परियोजनाएं चालू हो चुकी हैं और 18 लाख से अधिक किसानों को दिन में बिजली मिल रही है। वहीं, मागेल त्याला सौर पंप योजना के तहत 11 लाख 86 हजार ऑफ-ग्रिड सौर पंप चालू किए गए हैं। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत राज्य में 13 लाख 12 हजार घरों पर 3,115 मेगावाट क्षमता के सौर प्रकल्प शुरू किए गए हैं। स्मार्ट मीटरिंग में भी 57 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया गया है।

एआई तकनीक से 1,200 करोड़ रुपये की बचत

महावितरण ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित बिजली मांग पूर्वानुमान और विश्लेषण प्रणाली के जरिए बिजली खरीद में 1,200 करोड़ रुपये से अधिक की बचत की है। आधार आधारित ओटीपी सत्यापन प्रणाली शुरू करने वाली कंपनी देश की पहली बिजली वितरण कंपनी बनी है। नए कनेक्शन, लोड में बदलाव और बिल पर नाम बदलने जैसी सेवाओं के ऑनलाइन आवेदनों को स्वचालित मंजूरी भी दी जा रही है।

बिजली चोरी के 133 करोड़ रुपये के मामले उजागर

अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई में 133 करोड़ 32 लाख रुपये की चोरी उजागर की गई, जिसमें से 65 करोड़ 56 लाख रुपये की वसूली हुई। तकनीकी नवाचार, हरित ऊर्जा, ग्राहक सेवाओं और बिजली खरीद में बचत के प्रयासों के चलते महावितरण को राष्ट्रीय परिषद में सात पुरस्कार मिले हैं।

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