एनएचएआई की ओर से अहम हिस्से का काम प्राथमिकता पर नहीं लेने के बाद सरकार ने निर्माण और भूमि अधिग्रहण की जिम्मेदारी एमएसआरडीसी को सौंपने का फैसला किया है।
राहुल गुप्ता
मुंबई, 16 अक्टूबर। महाराष्ट्र सरकार पुणे रिंग रोड परियोजना पर 10,502 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करेगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से सड़क के एक अहम हिस्से का काम प्राथमिकता के आधार पर शुरू नहीं किए जाने के बाद सरकार ने संबंधित पैकेज महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) को सौंपने का फैसला किया है। इसके साथ ही परियोजना की कुल अनुमानित लागत बढ़कर 53,213.39 करोड़ रुपये हो जाएगी।
यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब राज्य की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है। वर्ष 2026-27 में महाराष्ट्र का बकाया सार्वजनिक कर्ज 11.02 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि राजस्व घाटा 40,552 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है।
पहले भी बढ़ चुकी है परियोजना की लागत
18 अगस्त 2026 को हुई बुनियादी ढांचा संबंधी कैबिनेट उपसमिति की बैठक में नागरिक निर्माण कार्यों और भूमि अधिग्रहण के लिए 10,502 करोड़ रुपये की संशोधित प्रशासनिक मंजूरी दी गई। सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, एनएचएआई द्वारा काम को प्राथमिकता नहीं दिए जाने और एमएसआरडीसी की ओर से संबंधित हिस्से के लिए पहले से भूमि अधिग्रहण पर खर्च किए जाने के कारण यह फैसला लिया गया।
वर्ष 2024 में राज्य मंत्रिमंडल ने परियोजना की लागत में 20,375.21 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी। इससे उस समय कुल लागत 42,711.03 करोड़ रुपये हो गई थी। अब अतिरिक्त खर्च के बाद यह राशि 53,213.39 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है।
सरकार का कहना है कि रिंग रोड का उद्देश्य पूरा करने और केंद्र सरकार की ओर से मंजूर मार्ग संरचना के अनुसार निर्माण कार्य पूरा करने के लिए भूमि अधिग्रहण और सड़क निर्माण की जिम्मेदारी एमएसआरडीसी को देना जरूरी है।
पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में बन रही है रिंग रोड
पुणे रिंग रोड के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों का उद्देश्य शहर और आसपास के इलाकों में यातायात का दबाव कम करना है।
पूर्वी हिस्सा मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर उर्से से शुरू होकर आलंदी-मार्कल रोड पर सोलू तक जाता है। इसके बाद यह पुणे-सोलापुर रोड पर सॉर्टापवाड़ी तक पहुंचता है। सितंबर 2021 में इस हिस्से की लंबाई 68.19 किलोमीटर और अनुमानित लागत 10,159.82 करोड़ रुपये थी। वर्ष 2024 में इसकी लंबाई संशोधित कर 72.335 किलोमीटर कर दी गई और लागत बढ़कर 19,932.98 करोड़ रुपये हो गई।
पश्चिमी हिस्सा मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर उर्से से पुणे-सतारा रोड पर वरवे बुद्रुक तक प्रस्तावित है। सितंबर 2021 में इसकी अनुमानित लागत 12,176 करोड़ रुपये थी, जो 2024 में बढ़कर 22,778.05 करोड़ रुपये हो गई।

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के साथ साझा हिस्सा भी अहम
इस परियोजना में प्रस्तावित पुणे-छत्रपति संभाजीनगर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और पूर्वी रिंग रोड का एक साझा हिस्सा भी शामिल है। एनएचएआई के प्रस्तावित मार्ग के अनुसार, यह सड़क सॉर्टापवाड़ी के पास वाल्टी गांव में पूर्वी रिंग रोड को काटती है और राष्ट्रीय राजमार्ग-48 पर शिवरे गांव के पास समाप्त होती है। दोनों परियोजनाओं के बीच 31.805 किलोमीटर का साझा हिस्सा है।
राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य को केंद्र से मंजूर मार्ग संरचना के अनुरूप पूरा करने की जरूरत को भी काम एमएसआरडीसी को सौंपने का आधार बताया है।
कल्याणकारी योजनाओं के बीच बढ़ेगा वित्तीय दबाव
रिंग रोड पर अतिरिक्त खर्च का फैसला ऐसे समय आया है, जब महाराष्ट्र सरकार कई बड़ी योजनाओं के लिए भी धन जुटा रही है। इनमें माझी लाडकी बहिन योजना शामिल है, जिसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये दिए जाते हैं। इसके अलावा पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर कृषि ऋण माफी योजना और सूखे जैसी स्थिति घोषित किए गए राज्य के 358 में से 304 तहसीलों के किसानों के लिए हाल में घोषित 5,000 रुपये की सहायता भी सरकार की वित्तीय प्रतिबद्धताओं में शामिल है।
वर्ष 2026-27 के लिए महाराष्ट्र का राजकोषीय घाटा 1,50,491 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 2.8 प्रतिशत है। वहीं, राजस्व घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 0.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। ऐसे में पुणे रिंग रोड पर बढ़ता खर्च राज्य के बजट और विकास योजनाओं के बीच संसाधनों के प्रबंधन को और महत्वपूर्ण बना सकता है।
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