12 राज्यों की 77 इकाइयां ले रही हैं हिस्सा; खादी उत्पादों पर 20% और ग्रामोद्योग उत्पादों पर 10% की विशेष छूट,31 अक्टूबर तक चलेगा महोत्सव
न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई, 16 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘हर घर स्वदेशी, घर-घर स्वदेशी’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के संदेश को युवा पीढ़ी, विशेषकर जेन-जी तक पहुंचाने के उद्देश्य से मुंबई में ‘खादी महोत्सव-2026’ का आयोजन किया गया है। खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के अध्यक्ष मनोज गोयल ने गुरुवार को विले पार्ले स्थित आयोग के मुख्यालय परिसर में महोत्सव का उद्घाटन किया। इस आयोजन के माध्यम से खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों को आधुनिक जीवनशैली से जोड़ने और देश के कारीगरों तथा ग्रामीण उद्यमियों के लिए नए बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
31 अक्टूबर तक चलेगा महोत्सव
खादी और ग्रामोद्योग आयोग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से आयोजित यह महोत्सव 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इसमें खादी उत्पादों पर 20 प्रतिशत और ग्रामोद्योग उत्पादों पर 10 प्रतिशत की विशेष छूट दी जा रही है। देश के 12 राज्यों की 77 इकाइयां अपने उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री के लिए 77 स्टॉल लगा रही हैं।
इनमें 36 खादी इकाइयां, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) से जुड़ी 33 इकाइयां तथा ग्रामोद्योग और अन्य योजनाओं से संबंधित आठ इकाइयां शामिल हैं। गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और राजस्थान की इकाइयां इसमें भाग ले रही हैं।
कपड़ों से लेकर हस्तशिल्प तक उपलब्ध हैं स्वदेशी उत्पाद
महोत्सव में खादी वस्त्र, सिल्क खादी, पॉली-खादी, रेडीमेड परिधान, हर्बल उत्पाद, खाद्य पदार्थ, साबुन, अगरबत्ती, मसाले, चमड़े के उत्पाद, कृत्रिम आभूषण, लकड़ी के खिलौने, बैग, फुलकारी, आंवला आधारित उत्पाद और लकड़ी के हस्तशिल्प सहित कई स्वदेशी उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने के साथ कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना है।
आधुनिक फैशन से जोड़कर खादी को लोकप्रिय बनाने की पहल
केवीआईसी अध्यक्ष मनोज गोयल ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान खादी को स्वावलंबन और आर्थिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनाया था। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी संबंधी आह्वान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि जेन-जी की ऊर्जा, रचनात्मकता, तकनीकी समझ और उद्यमशीलता स्वदेशी आंदोलन को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ सकती है। खादी को आधुनिक डिजाइन, आकर्षक परिधान, बेहतर ब्रांडिंग और समकालीन जीवनशैली के अनुरूप प्रस्तुत करके युवाओं के बीच अधिक लोकप्रिय बनाया जा सकता है।
गोयल के अनुसार, खादी की पारंपरिक पहचान और भारतीय विरासत को बनाए रखते हुए उसकी मार्केटिंग तथा प्रस्तुतीकरण में समय के अनुसार बदलाव करना जरूरी है। युवा केवल स्वदेशी उत्पादों के उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि उनके ब्रांड एंबेसडर, डिजाइनर, डिजिटल प्रमोटर और उद्यमी भी बन सकते हैं।
‘बात खादी की’ पॉडकास्ट से युवाओं तक पहुंचेगा संदेश
युवा पीढ़ी को खादी की विरासत, नवाचार, आधुनिक फैशन और उद्यमिता से जोड़ने के लिए केवीआईसी ने ‘बात खादी की’ पॉडकास्ट की पहल की है। इसके माध्यम से संवाद के जरिए जेन-जी को स्वदेशी आंदोलन से जोड़ने और खादी को आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
गोयल ने कहा कि सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स, डिजिटल मार्केटिंग और स्टार्टअप के माध्यम से युवा खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों को देश के विभिन्न हिस्सों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
‘लोकल टू ग्लोबल’ पर जोर, 2.04 करोड़ लोगों को रोजगार
केवीआईसी अध्यक्ष ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए उत्पादों की गुणवत्ता, आधुनिक डिजाइन, आकर्षक पैकेजिंग, प्रभावी ब्रांडिंग और डिजिटल बाजारों तक पहुंच पर विशेष ध्यान देना होगा। युवा डिजाइनर खादी को नए फैशन से जोड़ सकते हैं, जबकि डिजिटल उद्यमी और स्टार्टअप इसके बाजार विस्तार में योगदान दे सकते हैं।
मीडिया से बातचीत के दौरान गोयल ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र का कारोबार 1.87 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जबकि इस क्षेत्र के माध्यम से 2.04 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यह क्षेत्र 2.51 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य भी हासिल करेगा।
पढ़ने के लिए धन्यवाद
आपका समय और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। अगर यह खबर आपके लिए उपयोगी रही, तो हमसे जुड़े रहें — हर ज़रूरी खबर के लिए Newsam को फ़ॉलो करें।