टाइगर श्रॉफ पर गोलीबारी को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने फडणवीस सरकार पर साधा निशाना; कहा— अहमदाबाद जेल से गैंग चलाना सरकार के संरक्षण के बिना संभव नहीं
न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई, 19 अक्टूबर। फिल्म अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर गोलीबारी की घटना को लेकर महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की अब तक पूछताछ नहीं होने पर सवाल करते हुए पूछा कि बिश्नोई भाजपा का कौन लगता है? उन्होंने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चुनौती दी कि खोखली घोषणाएं करने के बजाय बिश्नोई को मुंबई लाकर उससे पूछताछ करने और उसके खिलाफ मुकदमा चलाने की हिम्मत दिखाएं।
सपकाल ने आरोप लगाया कि बिश्नोई गैंग की गतिविधियां गुजरात की जेल से संचालित हो रही हैं और सरकार के संरक्षण के बिना ऐसा संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि मुंबई जैसे शहर में खुलेआम गोलीबारी की घटनाएं होना राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मुंबई पुलिस का दबदबा खत्म होने का आरोप
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि मुंबई पुलिस की प्रतिष्ठा अब अतीत की बात बन गई है। उनके मुताबिक, पुलिस की सख्ती विपक्षी नेताओं और विद्यार्थियों के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित रह गई है, जबकि अपराधियों पर उसका प्रभाव दिखाई नहीं देता।
सपकाल ने कहा कि मुंबई के अलावा पुणे, ठाणे और नागपुर में भी आपराधिक घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इन पर प्रभावी नियंत्रण नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने फडणवीस को महाराष्ट्र के इतिहास का सबसे निष्क्रिय गृहमंत्री बताते हुए आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई है।
बाबा सिद्दीकी, सलमान खान और रोहित शेट्टी के मामलों का उठाया मुद्दा
सपकाल ने पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की गोली मारकर हत्या, अभिनेता सलमान खान के घर पर हमले और फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी के घर पर हमले की घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन मामलों में बिश्नोई गैंग का नाम सामने आने के बावजूद अब तक इस गैंगस्टर से पूछताछ क्यों नहीं की गई?
उन्होंने सवाल किया कि महाराष्ट्र पुलिस के हाथ किसने बांध रखे हैं और राज्य सरकार इस मामले में क्या कदम उठा रही है। हालांकि, ये आरोप कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के बयान का हिस्सा हैं; संबंधित मामलों में जिम्मेदारी और भूमिका का निर्धारण जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है।
बिश्नोई को मिले कानूनी संरक्षण को वापस लेने की मांग
कांग्रेस नेता ने लॉरेंस बिश्नोई को गुजरात से बाहर ले जाकर पूछताछ करने पर लगी कथित कानूनी रोक का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के अगस्त 2023 के आदेश के तहत दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 268 का इस्तेमाल कर बिश्नोई को सुरक्षा संबंधी संरक्षण दिया गया है।
सपकाल के अनुसार, इस प्रावधान के कारण दूसरे राज्यों की पुलिस बिश्नोई को पूछताछ के लिए गुजरात से बाहर नहीं ले जा सकती और संबंधित आदेश का हर साल नवीनीकरण किया जाता है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से मांग की कि केंद्र सरकार द्वारा दिए गए इस कानूनी संरक्षण को वापस लेने के लिए पहल की जाए, ताकि बिश्नोई से पूछताछ का रास्ता खुल सके।
दूसरे राज्यों की पुलिस के उदाहरण देकर फडणवीस से मांगा जवाब
सपकाल ने कहा कि मुख्यमंत्री फडणवीस बिश्नोई के आकाओं के खिलाफ कार्रवाई करने की बात करते हैं, लेकिन जनता पहले भी ऐसी घोषणाएं सुन चुकी है। उन्होंने सवाल किया कि जब असम पुलिस दूसरे राज्यों में जाकर विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार कर सकती है और बिहार में जीरो एफआईआर दर्ज कर मुंबई की घटना की सीबीआई जांच हो सकती है, तो अहमदाबाद की जेल में बंद बिश्नोई से पूछताछ क्यों नहीं की जा सकती?
उन्होंने मुख्यमंत्री से इस सवाल का स्पष्ट जवाब देने की मांग की। सपकाल ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की नीतियों के कारण महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि दूसरों पर सवाल उठाने से पहले मुख्यमंत्री को अपने प्रशासन के कामकाज की समीक्षा करनी चाहिए।
पुलिस पर वसूली और विपक्ष को निशाना बनाने का आरोप
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुलिस को विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने और जगह-जगह वसूली करने तक सीमित कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि बुलढाणा जिले के कांग्रेस के पूर्व विधायक राहुल बोंद्रे के भाजपा में शामिल नहीं होने के कारण उनके खिलाफ पुलिस जांच का दबाव बढ़ाया जा रहा है।
सपकाल ने गैंगस्टरों, ड्रग्स माफिया, रेत माफिया और अन्य आपराधिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करने में महायुति सरकार को विफल बताते हुए सरकार से जवाबदेही की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं कर सकती, तो उसे सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।
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