छत्रपति संभाजीनगर विभाग में सबसे चिंताजनक स्थिति, जल भंडारण घटकर 41.84 प्रतिशत पर पहुंचा
न्यूज़म ब्यूरो
छत्रपति संभाजीनगर, 19 अक्टूबर। महाराष्ट्र में जलाशयों का जलस्तर तेजी से घटने से आने वाले दिनों में पेयजल और सिंचाई की समस्या बढ़ने की आशंका है। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के जलाशयों में फिलहाल कुल उपयोगी जल भंडारण 70.53 प्रतिशत रह गया है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 90.74 प्रतिशत था। इस तरह पिछले साल की तुलना में जल भंडारण में 20.21 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
छत्रपति संभाजीनगर विभाग में स्थिति गंभीर
राज्य के छत्रपति संभाजीनगर विभाग में सबसे कम 41.84 प्रतिशत जल भंडारण उपलब्ध है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यहां 88.12 प्रतिशत पानी था। अमरावती विभाग में 59.47 प्रतिशत, नागपुर में 65.43 प्रतिशत, नासिक में 78.88 प्रतिशत और पुणे में 81.29 प्रतिशत जल भंडारण दर्ज किया गया है। कोंकण विभाग में सबसे अधिक 87.84 प्रतिशत पानी उपलब्ध है।
छोटे बांधों में कम पानी से बढ़ेगी परेशानी
राज्य के बड़े जलाशयों में 78.50 प्रतिशत, मध्यम परियोजनाओं में 61.71 प्रतिशत और छोटी परियोजनाओं में केवल 40.85 प्रतिशत जल भंडारण है। छोटे जलाशयों में पानी की कमी से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति और खेती के लिए सिंचाई की समस्या बढ़ने की आशंका है।
3,033 परियोजनाओं में 28,792 मिलियन घन मीटर पानी
राज्य में कुल 3,033 जल परियोजनाएं हैं। इनमें 138 बड़ी, 264 मध्यम और 2,631 छोटी परियोजनाएं शामिल हैं। इनकी कुल उपयोगी जल भंडारण क्षमता 40,826.07 मिलियन घन मीटर है, जबकि वर्तमान में 28,792.90 मिलियन घन मीटर पानी उपलब्ध है।
जल भंडारण में आई कमी को देखते हुए आने वाले दिनों में पेयजल, कृषि और अन्य आवश्यकताओं के लिए पानी का नियोजन महत्वपूर्ण होगा। यदि जलस्तर में सुधार नहीं हुआ, तो विशेषकर कम भंडारण वाले क्षेत्रों में जल संकट गहरा सकता है।
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