बोर्ड परीक्षा से पहले दिसंबर में CET का पहला प्रयास कराने के फैसले से विद्यार्थियों और अभिभावकों में असमंजस पैदा करने का आरोप
न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई, 21 अक्टूबर। महाराष्ट्र में MHT-CET 2027 परीक्षा के आयोजन को लेकर राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रदेश महासचिव एडवोकेट अमोल मातले ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा के पहले प्रयास को दिसंबर में आयोजित करने के प्रस्ताव से विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच भ्रम और तनाव की स्थिति पैदा हुई। अब सरकार ने अपने फैसले में बदलाव करते हुए दोनों प्रयास 12वीं की बोर्ड परीक्षा के बाद आयोजित करने की घोषणा की है। मातले ने इसे सरकार की नीतिगत अस्थिरता और उचित नियोजन के अभाव का उदाहरण बताया।
फैसले में बदलाव से विद्यार्थियों में असमंजस
एडवोकेट अमोल मातले ने कहा कि MHT-CET 2027 के पहले प्रयास को दिसंबर में आयोजित करने का निर्णय जल्दबाजी में लिया गया था। उनके अनुसार, जब 12वीं कक्षा का 50 से 60 प्रतिशत पाठ्यक्रम भी पूरा नहीं हुआ था, तब दिसंबर में परीक्षा कराने की योजना कैसे बनाई गई? उन्होंने सवाल किया कि क्या शिक्षा विभाग ने इस निर्णय से पहले विद्यार्थियों की शैक्षणिक तैयारी और बोर्ड परीक्षा की समय-सारिणी का आकलन किया था?
मातले ने कहा कि पहले जल्दबाजी में निर्णय लेना, फिर विद्यार्थियों और अभिभावकों को परेशानी में डालना और विरोध के बाद फैसला बदलना शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव, अभिभावकों पर आर्थिक बोझ का आरोप
मातले ने दावा किया कि दिसंबर में CET का पहला प्रयास होने की आशंका के कारण कई विद्यार्थियों और अभिभावकों ने महंगे क्रैश कोर्स में दाखिला लिया। इसके अलावा विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ परीक्षा की तैयारी को लेकर अतिरिक्त मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा।
उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार के फैसलों में बार-बार होने वाले बदलावों से विद्यार्थियों के समय, मेहनत और अभिभावकों के पैसे का नुकसान होने पर जिम्मेदारी कौन लेगा? उनके मुताबिक, शिक्षा व्यवस्था में नीतिगत प्रयोग करने से पहले विद्यार्थियों और अभिभावकों की परेशानियों को ध्यान में रखना जरूरी है।
शिक्षा नीति में निरंतरता की कमी का आरोप
उन्होंने ने कहा कि CET परीक्षा, शिक्षक भर्ती और स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया जैसे मामलों में शिक्षा विभाग की नीतियों को लेकर स्पष्टता और स्थिरता जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले शिक्षा विशेषज्ञों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों से पर्याप्त चर्चा नहीं करती।
मातले के अनुसार, शिक्षा से जुड़े फैसलों में बार-बार बदलाव होने से विद्यार्थियों की तैयारी प्रभावित होती है और पूरी शैक्षणिक व्यवस्था पर इसका असर पड़ता है।
CET की निश्चित तारीख और पारदर्शी समय-सारिणी जारी करने की मांग
मातले ने कहा कि 12वीं की बोर्ड परीक्षा विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन का महत्वपूर्ण चरण है। ऐसे में बोर्ड परीक्षा के दबाव के बीच CET की तारीखों को लेकर अनिश्चितता विद्यार्थियों की परेशानी बढ़ाती है।
उन्होंने राज्य सरकार और CET सेल से मांग की कि MHT-CET 2027 के दोनों प्रयासों की निश्चित तारीखें जल्द घोषित की जाएं। साथ ही, परीक्षा का पारदर्शी और स्पष्ट कार्यक्रम जारी किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को अपनी तैयारी की योजना बनाने में आसानी हो और उन्हें अनावश्यक मानसिक तनाव का सामना न करना पड़े।
विद्यार्थियों के हितों के लिए आंदोलन की चेतावनी
एडवोकेट अमोल मातले ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में विद्यार्थियों के करियर और शैक्षणिक भविष्य को प्रभावित करने वाले फैसले इसी तरह जल्दबाजी में लिए गए, तो उनकी पार्टी चुप नहीं बैठेगी।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर सड़क पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा।
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