MPSC आंदोलन पर मंत्री के बयान को कांग्रेस ने बताया विद्यार्थियों का अपमान, सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग भर्ती में देरी, परीक्षा कार्यक्रम में गड़बड़ी और पेपर लीक को लेकर महायुति सरकार पर साधा निशाना
न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई, 21 अक्टूबर। पुणे में महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) की परीक्षा से जुड़ी मांगों को लेकर विद्यार्थियों के आंदोलन पर महाराष्ट्र सरकार के मंत्री जयकुमार गोरे की टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे ने गोरे के बयान की आलोचना करते हुए उन्हें विद्यार्थियों के साथ आंदोलन में बैठने की चुनौती दी है। लोंढे ने कहा, “मैं मंत्री जयकुमार गोरे को प्रतिदिन 3 हजार रुपये देता हूं। वे विद्यार्थियों के साथ आंदोलन में बैठकर दिखाएं।” उन्होंने मंत्री से अपने बयान के लिए विद्यार्थियों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग भी की।
दस दिन के आंदोलन के बाद सरकार ने मानी मांगें
अतुल लोंढे ने कहा कि पुणे में MPSC के विद्यार्थियों ने दस दिनों तक आंदोलन किया, जिसके बाद महायुति सरकार को उनकी मांगों पर ध्यान देना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय सरकार के मंत्री अब आंदोलन की आलोचना कर रहे हैं। लोंढे के अनुसार, मंत्री जयकुमार गोरे की टिप्पणी उन विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों का अपमान है, जो अपने भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
70 हजार रिक्त पदों पर भर्ती नहीं करने का आरोप
कांग्रेस प्रवक्ता ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में लगभग 70 हजार पद रिक्त होने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया में तेजी नहीं लाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि MPSC परीक्षाओं का कार्यक्रम भी प्रभावित हो रहा है और परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं। लोंढे ने महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग की कार्यप्रणाली में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान करने में विफल रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले लाखों विद्यार्थी MPSC परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में उनके आंदोलन पर सवाल उठाने के बजाय सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। लोंढे ने कहा कि न्याय की मांग के लिए आंदोलन करना विद्यार्थियों का अधिकार है और सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए।
आंदोलन के पीछे विदेशी ताकतों के आरोप पर सवाल
अतुल लोंढे ने मंत्री जयकुमार गोरे के उस कथित बयान पर भी सवाल उठाए, जिसमें विद्यार्थी आंदोलन के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ होने की बात कही गई थी। उन्होंने पूछा कि यदि केंद्र में पिछले 13 वर्षों से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार देश की सुरक्षा को मजबूत करने का दावा कर रही है, तो विदेशी ताकतें पुणे तक कैसे पहुंच गईं?
लोंढे ने आरोप लगाया कि भाजपा आंदोलनकारियों की मांगों पर जवाब देने के बजाय आंदोलनों को बदनाम करने की कोशिश करती है। उन्होंने किसान आंदोलन और जंतर-मंतर पर हुए आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न आंदोलनों को विदेशी ताकतों या देशविरोधी गतिविधियों से जोड़ने के आरोप लगाना उचित नहीं है।
विद्यार्थियों से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग
कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता ने मंत्री जयकुमार गोरे से अपने बयान पर स्पष्टीकरण देने और विद्यार्थियों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को रोजगार, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और समय पर परीक्षा आयोजित होने की अपेक्षा है।
लोंढे ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने विद्यार्थियों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया और उनके आंदोलनों को बदनाम करने का प्रयास जारी रखा, तो युवाओं में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ सकती है। उन्होंने सरकार से भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने, परीक्षा व्यवस्था में सुधार करने और विद्यार्थियों की मांगों पर ठोस कदम उठाने की अपील की।
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