अमृतसर से मुंबई तक हथियार पहुंचाने के आरोप में दो महिलाएं गिरफ्तार हुई हैं। इस मामले ने मुंबई अंडरवर्ल्ड में सक्रिय महिला माफियाओं की भूमिका फिर चर्चा में ला दी है।
राहुल गुप्ता
मुंबई, 21 अक्टूबर। बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर 8 अक्टूबर को हुई गोलीबारी के मामले में हथियार अमृतसर से मुंबई पहुंचाने के आरोप में दो महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है। इस गिरफ्तारी के बाद मुंबई अंडरवर्ल्ड में महिलाओं की भूमिका एक बार फिर चर्चा में आ गई है। आमतौर पर मुंबई के अपराध जगत की कहानी में दाऊद इब्राहिम, हाजी मस्तान, करीम लाला और वरदराजन मुदलियार जैसे गैंगस्टरों के नाम सामने आते हैं। हालांकि, इस दुनिया में कई महिलाओं ने भी अहम भूमिका निभाई है।
इनमें कुछ महिलाओं ने ड्रग्स के कारोबार और वसूली के नेटवर्क में अपनी पकड़ बनाई, तो कुछ पर गैंग के लिए हथियार पहुंचाने, आर्थिक लेन-देन संभालने और अपराधियों को कानूनी मदद देने जैसे कामों में शामिल होने के आरोप लगे। अंडरवर्ल्ड में ऐसी महिलाओं को कई बार ‘बहन’ कहकर भी संबोधित किया जाता था।
दाऊद इब्राहिम भी जिन्हें ‘मौसी’ कहता था
मुंबई अंडरवर्ल्ड की चर्चित महिला अपराधियों में जेनाबाई दरवेश उर्फ ‘जेनाबाई दारूवाली’ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। जिस दौर में हाजी मस्तान, करीम लाला और वरदराजन मुदलियार का प्रभाव था, उस समय जेनाबाई का भी अपराध जगत में दबदबा बताया जाता है।
निशांत सरवणकर की विशेष लेखमाला ‘गोष्ट मुंबईच्या अंडरवर्ल्डची’ के मुताबिक, जेनाबाई ने कम उम्र में सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लिया था और महज 14 साल की उम्र में उसकी शादी हो गई थी। विभाजन के बाद पांच बच्चों के पालन-पोषण के लिए उसने अनाज के कथित काले बाजार से शुरुआत की। बाद में वरदराजन मुदलियार के संपर्क में आने के बाद वह शराब के अवैध कारोबार से जुड़ गई।
बताया जाता है कि शुरुआती दौर में उसने दाऊद इब्राहिम को भी आश्रय दिया था। अपराध जगत में प्रभाव रखने के साथ-साथ वह पुलिस को गुप्त सूचनाएं भी देती थी। उसे मुंबई की शुरुआती महिला माफियाओं में गिना जाता है। करीब 1993 में उसकी मौत हो गई थी।
ड्रग्स के कारोबार से वसूली तक, महिलाओं ने संभाली कमान
मुंबई अंडरवर्ल्ड में जेनाबाई के बाद भी कई महिलाएं चर्चा में रहीं। इनमें महालक्ष्मी पप्पामणि उर्फ ‘अम्मा’ और दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर के नाम शामिल हैं।
- महालक्ष्मी पप्पामणि उर्फ अम्मा: 1960 में एक गरीब तमिल परिवार में जन्मी महालक्ष्मी 1980 में मुंबई आई थी। बताया जाता है कि शुरुआत में वह अपने पति के मादक पदार्थों के कारोबार में मदद करती थी। बाद में वरदराजन मुदलियार के संरक्षण में उसने सायन कोलीवाड़ा इलाके में अपना ड्रग्स नेटवर्क खड़ा किया।
- हसीना पारकर: दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर का नाम दक्षिण मुंबई में रियल एस्टेट विवादों, कथित वसूली और समझौते कराने से जुड़े मामलों में सामने आया था। कुर्ला के गोवावाला कंपाउंड विवाद में भी उसका नाम चर्चा में रहा।
पति की हत्या के बाद दाऊद से दुश्मनी, गैंग की कमान भी संभाली
अंडरवर्ल्ड में कुछ महिलाओं का प्रवेश पारिवारिक संबंधों और निजी दुश्मनी के कारण हुआ। अशरफ खान उर्फ ‘सपना दीदी’ इसका एक चर्चित उदाहरण है।
बताया जाता है कि दाऊद इब्राहिम के करीबी माने जाने वाले मेहमूद कालिया की हत्या के बाद सपना दीदी ने दाऊद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उसने हथियार चलाने और मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण लिया था। उसके बारे में यह भी कहा जाता है कि उसने शारजाह में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के दौरान दाऊद पर हमला करने की योजना बनाई थी। हालांकि, यह योजना सफल नहीं हुई। 1994 में नागपाड़ा स्थित उसके घर में उसकी हत्या कर दी गई।
इसी तरह गैंगस्टर अश्विन नाइक की पत्नी नीता नाइक के बारे में बताया जाता है कि अश्विन के जेल में रहने और विदेश में होने के दौरान उसने कथित वसूली नेटवर्क की कमान संभाली। बाद में वह शिवसेना की नगरसेविका भी चुनी गई। वर्ष 2000 में उसकी हत्या कर दी गई थी।
‘भाई’ के साथ ‘बहनों’ की भी अहम भूमिका
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के प्रोफेसर अब्दुल शबान ने अपने शोधपत्र ‘Underworld and the Police in Mumbai’ में मुंबई के अपराध जगत में महिलाओं की भूमिकाओं का उल्लेख किया है। उनके मुताबिक, महिलाएं केवल गैंगस्टरों की सहयोगी नहीं थीं, बल्कि कई मामलों में आर्थिक लेन-देन, कानूनी सहायता और अन्य जिम्मेदारियां भी संभालती थीं।
इस संदर्भ में अबू सलेम की साथी मोनिका बेदी, बबलू श्रीवास्तव की करीबी बताई जाने वाली अर्चना शर्मा, छोटा शकील के गिरोह से जुड़ी रुबीना सिराज सैयद उर्फ ‘हीरोइन’ और डी-कंपनी के लिए कथित तौर पर जाली नोटों की आपूर्ति करने वाली परवीन सुल्ताना जैसे नाम भी सामने आते हैं।
हथियारों की तस्करी में महिलाओं का इस्तेमाल
अपराधी गिरोहों पर नजर रखने वाली जांच एजेंसियों के सामने महिलाओं के जरिए हथियारों की आवाजाही के मामले भी आते रहे हैं। कई मामलों में महिलाओं को हथियार या गोला-बारूद एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने और उन्हें छिपाने की जिम्मेदारी दिए जाने के आरोप लगे हैं।
- जैबुन्निसा काजी: 1993 के मुंबई बम धमाकों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, उसके घर से हथियार, गोला-बारूद और हथगोले बरामद हुए थे।
- निखत अंसारी: वर्ष 2009 में मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने उसे छोटा शकील गिरोह के लिए कथित तौर पर हथियारों की ढुलाई करते हुए पकड़ा था।
- राधा और बबिता: टाइगर श्रॉफ पर गोलीबारी के मामले में इन दोनों महिलाओं पर अमृतसर से मुंबई तक हथियार पहुंचाने का आरोप है। उनकी गिरफ्तारी ने एक बार फिर इस बात की ओर ध्यान खींचा है कि अपराधी गिरोह हथियारों की आवाजाही के लिए अलग-अलग लोगों का इस्तेमाल करते हैं।
मुंबई अंडरवर्ल्ड का इतिहास बताता है कि अपराध जगत में महिलाओं की भूमिका केवल पर्दे के पीछे तक सीमित नहीं रही। कुछ ने कारोबार और नेटवर्क संभाले, तो कुछ पर हथियारों की आपूर्ति और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे। हालांकि, हर मामले में आरोपों और साबित हुए अपराधों के बीच अंतर करना जरूरी है।
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