बोरीवली के भगवती अस्पताल में मिलेंगी 490 बेड की आधुनिक सुविधाएं

50 प्रतिशत बेड मनपा के मरीजों के लिए आरक्षित, पीपीपी मॉडल पर 30 साल के अनुबंध की तैयारी

न्यूज़म ब्यूरो

मुंबई, 23 अक्टूबर। पश्चिमी उपनगर के नागरिकों को बोरीवली (पश्चिम) स्थित श्री हरिलाल भगवती अस्पताल में 490 बेड वाले आधुनिक मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल की सुविधा मिलेगी। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने अस्पताल के संचालन के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल अपनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत 30 साल के अनुबंध के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की गई है। अस्पताल में 90 आईसीयू बेड, नौ आधुनिक ऑपरेशन थिएटर और अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने की योजना है।

अस्पताल का स्वामित्व मनपा के पास रहेगा

मनपा प्रशासन के अनुसार, पीपीपी मॉडल अपनाने से अस्पताल का निजीकरण नहीं होगा। अस्पताल की जमीन और आधुनिक इमारत का 100 प्रतिशत स्वामित्व महानगरपालिका के पास रहेगा। निजी भागीदार केवल निर्धारित अवधि के लिए अस्पताल का संचालन करेगा। परिसर में मराठी भाषा में सूचना बोर्ड लगाना भी अनिवार्य होगा, जिस पर मनपा के स्वामित्व का उल्लेख रहेगा।

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50 प्रतिशत बेड सरकारी योजनाओं के लिए आरक्षित

अस्पताल के कुल बेड में से कम से कम 50 प्रतिशत बेड मनपा के मरीजों और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के लाभार्थियों के लिए आरक्षित रहेंगे। इनमें महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लाभार्थी शामिल होंगे। आरक्षित बेड की उपलब्धता और उनके उपयोग की जानकारी देने के लिए स्वागत कक्ष के पास डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड लगाया जाएगा।

ओपीडी जांच शुल्क 10 रुपये

मनपा ने अस्पताल में उपचार की दरें निर्धारित करने का प्रावधान किया है। सामान्य ओपीडी जांच शुल्क 10 रुपये, स्पेशलिटी ओपीडी शुल्क 293 रुपये और बड़े ऑपरेशन के लिए ऑपरेशन थिएटर शुल्क अधिकतम 1,200 रुपये रखने की योजना है। प्रशासन के मुताबिक, निर्धारित दरों का उद्देश्य मरीजों को किफायती उपचार उपलब्ध कराना है।

निजी भागीदार करेगा 150 करोड़ का निवेश

अनुबंध के तहत निजी संचालक को अस्पताल में कम से कम 150 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा। इससे कैथ लैब, एमआरआई, सीटी स्कैन और अन्य आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा, निजी संचालक मनपा को हर साल कम से कम 6.56 करोड़ रुपये किराये के रूप में अग्रिम भुगतान करेगा। किराये में प्रत्येक 10 वर्ष बाद 10 प्रतिशत वृद्धि का प्रावधान है।

गैर-लाभकारी संस्थाओं को ही अनुमति

निविदा में केवल कंपनी अधिनियम की धारा 8 के तहत पंजीकृत गैर-लाभकारी संस्थाएं या अधिकृत सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट भाग ले सकेंगे। संस्था के पास कम से कम 10 वर्ष का समाजसेवा अनुभव और पिछले पांच वर्षों में औसतन 100 करोड़ रुपये वार्षिक धर्मार्थ व्यय होना आवश्यक बताया गया है।

निगरानी और कार्रवाई के कड़े प्रावधान

अस्पताल की निगरानी के लिए मनपा आयुक्त विशेष कार्य अधिकारी नियुक्त करेंगे, जिन्हें अस्पताल के प्रबंधन सॉफ्टवेयर तक पहुंच मिलेगी। किराये में देरी पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और सेवाएं शुरू करने में देरी पर दंड का प्रावधान है। भर्ती मरीजों की सेवाएं शुरू करने में 240 दिनों से अधिक विलंब होने पर अनुबंध रद्द करने और अस्पताल का नियंत्रण वापस लेने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। मरीजों की शिकायतों के निपटारे के लिए विशेष कक्ष बनाया जाएगा, जहां 15 दिनों के भीतर निर्णय लेने का प्रावधान होगा।

मनपा प्रशासन का दावा है कि इस मॉडल से अस्पताल का स्वामित्व सुरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाएं विकसित होंगी और जरूरतमंद मरीजों को किफायती उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

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