राहुल गुप्ता
जालना, 29 सितंबर। मराठा आरक्षण आंदोलन का प्रमुख केंद्र रहे जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में करीब तीन साल से खड़ा मंडप और मंच अब हटा दिया गया है। मनोज जरांगे पाटिल के अनशन की पहचान बन चुके इस मंच को हटाए जाने के बाद आंदोलन के अगले चरण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जरांगे ने साफ कहा है कि मंच हटने का मतलब आंदोलन खत्म होना नहीं है। उन्होंने सरकार को तीन महीने का समय दिया है और मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को पाटोदा से आगे बढ़ाकर मुंबई तक ले जाने की चेतावनी दी है।
तीन साल से बना था आंदोलन का प्रमुख केंद्र
29 अगस्त 2023 से अंतरवाली सराटी मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख केंद्रों में रहा है। यहां जरांगे के अनशन के लिए मंडप और बड़ा मंच बनाया गया था। करीब तीन साल तक यह मंच आंदोलन की गतिविधियों का प्रमुख स्थल बना रहा। ग्राम पंचायत, ग्रामसभा और आंदोलन की कोर कमेटी के बीच चर्चा के बाद इसे हटाने का निर्णय लिया गया और कुछ ही समय में पूरा मंडप और मंच हटा दिया गया।
जरांगे का कहना है कि अब आंदोलन किसी एक जगह तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने येवला, परली, पाटोदा और पश्चिम महाराष्ट्र के अन्य इलाकों में आंदोलन आगे बढ़ाने की बात कही है। तीन महीने के भीतर मांगों पर समाधान नहीं होने पर मुंबई की ओर फिर से कूच करने की चेतावनी भी उन्होंने दी है।
जरांगे ने ग्रामीणों का जताया आभार
मंच हटाए जाने के बाद जरांगे ने अंतरवाली सराटी के ग्रामीणों के सहयोग के लिए उनका आभार जताया। उनके मुताबिक आंदोलन के दौरान गांव के लोगों ने भोजन, पानी और दूसरी व्यवस्थाओं में सहयोग किया और कई लोगों ने आंदोलन के लिए अपनी जमीन तक उपलब्ध कराई।
जरांगे ने कहा कि यह आंदोलन केवल एक गांव का नहीं, बल्कि मराठा समाज के अधिकारों से जुड़ा संघर्ष है और मंच हटने के बावजूद इसे जारी रखा जाएगा। बाद में गांव की महिलाओं की ओर से उठाए गए सवालों पर भी जरांगे ने कहा कि अंतरवाली सराटी के लोगों के संघर्ष को वह नहीं भूलेंगे।
ललिता तारख ने उठाए आरक्षण के लाभ पर सवाल
इसी बीच आंदोलन में सक्रिय रही अंतरवाली सराटी की ललिता तारख ने जरांगे के खिलाफ नाराजगी जताई है। तारख ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान गांव के लोगों और महिलाओं ने दिन-रात मेहनत की, लेकिन उन्हें इसका प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिला। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने हैदराबाद गजट के आधार पर कुणबी प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था, लेकिन करीब 10 महीने बाद भी उन्हें लाभ नहीं मिला। ये आरोप तारख के हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।
तारख ने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान महिलाओं की भावनाओं का इस्तेमाल किया गया और अंतरवाली सराटी के साथ 123 गांवों के लोगों को भी उम्मीदें दिखाई गईं। उन्होंने मांग की कि यदि बड़ी संख्या में कुणबी रिकॉर्ड का लाभ मिला है तो उसके स्पष्ट आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं।
मंडप हटाने के समय महिलाओं ने किया विरोध
ललिता तारख के मुताबिक, जब मंडप हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई तो गांव की कई महिलाएं वहां मौजूद थीं और उन्होंने उसे हटाने का विरोध किया। उनका आरोप है कि उस समय आंदोलन का नेतृत्व करने वाले लोग आगे नहीं आए। तारख ने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह आंदोलन और अनशन से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी खुलकर अपनी बात रखेंगी।
वहीं, जरांगे ने इन आरोपों पर कहा है कि अंतरवाली सराटी गांव ने मराठा समाज के लिए संघर्ष किया है और वह गांव के खिलाफ कुछ नहीं बोलेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है और उन्हें अलग-थलग करने की कोशिश हो रही है।
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