मुंबई में आदिवासी छात्रों का जनआक्रोश मार्च, मंत्री के इस्तीफे से लेकर छात्रवृत्ति तक की मांग

नासिक में लंबे आंदोलन के बाद छात्र संगठनों ने शिवाजी पार्क में मार्च का ऐलान किया है। आश्रमशालाओं की सुविधाओं और 584 विद्यार्थियों की समस्याओं पर कार्रवाई की मांग।

राहुल गुप्ता

मुंबई, 25 अक्टूबर। महाराष्ट्र में आदिवासी विद्यार्थियों की विभिन्न मांगों को लेकर रविवार को मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में आदिवासी GenZ जनआक्रोश मार्च आयोजित किया जा रहा है। छात्र संगठनों और प्रदर्शनकारियों का दावा है कि प्रशासन से आधिकारिक अनुमति नहीं मिलने के बावजूद वे मार्च निकालने पर अड़े हैं। इसे देखते हुए मुंबई पुलिस और प्रशासन सतर्क हैं।

42 दिन धरना, 13 दिन भूख हड़ताल के बाद भी मांगें लंबित

प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों का कहना है कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर नासिक में 42 दिनों तक धरना दिया, 13 दिनों तक भूख हड़ताल की और सात दिनों तक लंबा पैदल मार्च निकाला। इसके बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ। छात्रों का आरोप है कि सरकार ने उनकी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया, जिसके बाद उन्होंने मुंबई में जनआक्रोश मार्च निकालने का फैसला किया।

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मंत्री और अधिकारियों के इस्तीफे की मांग

आदिवासी विद्यार्थी विकास विभाग के मंत्री डॉ. अशोक उईके के साथ विभाग के आयुक्त और सचिव के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में सरकारी आश्रमशालाओं और छात्रावासों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना, वहां विद्यार्थियों की मौत के मामलों की जांच और छात्रवृत्ति समय पर देना शामिल है।

इसके अलावा, प्रदर्शनकारी 584 विद्यार्थियों से जुड़ी समस्याओं पर तत्काल निर्णय लेने की मांग कर रहे हैं।

सरकार को 25 अक्टूबर तक दिया था समय

छात्रों ने अपनी मांगें पूरी करने के लिए राज्य सरकार को 25 अक्टूबर तक का समय दिया था। इससे पहले उन्होंने मुंबई के आजाद मैदान में प्रदर्शन की कोशिश की थी, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के बाद पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था। इसके बाद विद्यार्थियों ने रविवार सुबह 11 बजे दादर के शिवाजी पार्क में जुटने का आह्वान किया।

पुलिस की निगरानी में मार्च

प्रदर्शन को देखते हुए मुंबई पुलिस और प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी कर रहे हैं। अलग-अलग स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, वे आंदोलन जारी रखेंगे।

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