CJI सूर्यकांत पर टिप्पणी के मामले में आपराधिक अवमानना की कार्यवाही; अदालत माफीनामे पर विचार करने के बाद आगे का फैसला करेगी।
राहुल गुप्ता
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत पर टिप्पणी के मामले में शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बिना शर्त माफी मांगी है। आपराधिक अवमानना की कार्यवाही के बीच राउत ने अदालत में हलफनामा दाखिल किया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 17 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। उस दिन अदालत उनके माफीनामे पर विचार कर आगे की कार्यवाही तय करेगी।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने कहा, “मैं 17 नवंबर को न्यायालय के समक्ष पेश होऊंगा।” उन्होंने कहा कि उन्हें अदालत में हुई कार्यवाही की पूरी जानकारी नहीं है, क्योंकि उनके वकील सुनवाई के दौरान मौजूद नहीं थे। इस मामले में पत्रकार निखिल वागले को भी पेश होने का निर्देश दिया गया है। उन्हें डिजिटल माध्यम से अदालत में उपस्थित होने की अनुमति मिली है।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने दायर की अवमानना याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्टूबर को संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से दायर अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया है कि दोनों के सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर किए गए पोस्ट से शीर्ष अदालत के प्रति सम्मान की कमी दिखाई देती है।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह मामला न्यायपालिका की पूरी संस्था से जुड़ा है। पीठ को बताया गया कि संजय राउत ने जवाबी हलफनामा दाखिल किया है। इसके बाद अदालत ने निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहें।
निखिल वागले ने भी मांगी बिना शर्त माफी
सुनवाई के दौरान निखिल वागले की ओर से पेश वकील ने बताया कि उन्होंने अपनी उन सोशल मीडिया पोस्ट के लिए बिना शर्त माफी मांगी है, जिन्हें बाद में हटा दिया गया था।
पीठ ने कहा कि वागले ने पोस्ट हटा दी हैं, खेद जताया है और बिना शर्त माफी मांगी है। इसलिए उन्हें डिजिटल माध्यम से अदालत में पेश होने की अनुमति दी गई।
वागले की वकील इंदिरा जयसिंह ने कारण बताओ नोटिस रद्द करने की अपील की। इस पर पीठ ने कहा कि मामले में उन्हें अदालत की सहायता की जरूरत है।
‘संस्था से प्यार करते हैं, लेकिन प्यार दोनों तरफ से होना चाहिए’
सुनवाई के दौरान इंदिरा जयसिंह ने कहा, “क्योंकि हम इस संस्था से प्यार करते हैं। लेकिन संस्था को भी हमसे प्यार करना चाहिए। यह प्यार दोनों तरफ से होना चाहिए।”
इस पर पीठ ने टिप्पणी की कि प्यार कभी भी एकतरफा नहीं होता। अब अदालत 17 नवंबर को संजय राउत के माफीनामे पर विचार करेगी और मामले में आगे की कार्यवाही तय करेगी।
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