शरद पवार से किसान ने कहा- छाती फाड़ेंगे तो भी साहेब ही दिखेंगे, पवार ने दिखा दिया BJP का पत्र

बारामती के जवळार्जुन में किसान से बातचीत के दौरान पवार ने भाजपा के लेटरहेड वाला पत्र दिखाकर ऐसा सवाल किया कि वहां हंसी छूट गई।

राहुल गुप्ता

बारामती, 3 अक्टूबर। वरिष्ठ नेता शरद पवार इन दिनों सूखे से प्रभावित इलाकों का दौरा कर किसानों से सीधे संवाद कर रहे हैं। शनिवार को वह बारामती तालुका के जवळार्जुन गांव पहुंचे, जहां उन्होंने किसानों से चारा, पानी, फसलों और खेती से जुड़ी समस्याओं की जानकारी ली। इसी दौरान एक किसान की बात और शरद पवार के जवाब ने माहौल को कुछ देर के लिए हल्का कर दिया।

किसान ने अपने परिवार की शरद पवार के प्रति निष्ठा का जिक्र करते हुए बताया कि उसके पिता उसे बारामती लेकर जाते थे। किसान के मुताबिक, उसके पिता कहा करते थे, “छाती फाड़ेंगे तो भी साहेब ही दिखेंगे।” किसान की यह बात सुनकर वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं।

इसके तुरंत बाद शरद पवार ने किसान की ओर से दिए गए पत्र को उठाकर सभी को दिखाया। पत्र भाजपा के लेटरहेड पर था और उस पर कमल का चुनाव चिन्ह बना हुआ था। पवार ने पत्र दिखाते हुए मिश्किल अंदाज में पूछा, “फिर यह क्या है?” उनके इस सवाल के बाद वहां मौजूद लोगों में हंसी छूट गई।

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किसानों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री से मिलेंगे

किसानों से बातचीत के दौरान शरद पवार ने सूखे की स्थिति और उनकी समस्याओं को लेकर जल्द मुख्यमंत्री से चर्चा करने की बात कही। उन्होंने कहा कि अगले दो से तीन दिनों में वह मुख्यमंत्री से विस्तार से बातचीत करेंगे।

पवार के मुताबिक, खेती और खेती से जुड़े कर्ज, फलबाग और मोटर के लिए लिए गए कर्ज को पूरी तरह माफ करने की मांग की जाएगी। उन्होंने किसानों के बिजली बिल माफ करने और पीने के पानी के लिए टैंकर शुरू करने की मांग भी रखी है।

उन्होंने यह भी कहा कि सूखे से संबंधित मंजूरियों के अधिकार तालुका स्तर पर दिए जाने चाहिए।

कुछ तालुकों में अभी सूखा घोषित नहीं

शरद पवार ने कहा कि गांव के लोगों ने मेहनत करके अपने क्षेत्र और खेती की स्थिति बदली है, लेकिन अब सूखे की स्थिति सामने आ गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कुछ क्षेत्रों में सूखा घोषित किया है, लेकिन कुछ तालुकों में अभी सूखा घोषित नहीं किया गया है। इस मुद्दे पर भी वह सरकार से बात करेंगे।

किसानों से संवाद के दौरान पवार ने अपने पुराने दौरों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब वह सरकार में थे, तब वह इस गांव में तीन बार आए थे। उनके मुताबिक, गांव के लोगों ने इसे बदलने के लिए मेहनत की और अब गांव की स्थिति बदली हुई नजर आती है। उन्होंने कहा कि सूखे की स्थिति में बहुत कुछ किसानों और उनके हाथ में नहीं होता।

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