मानव पिरामिड बनाकर दही हांडी फोड़ने के दौरान हुए हादसे; पश्चिमी उपनगर में एक गोविंदा का अभी अस्पताल में इलाज जारी
Rahul Gupta
मुंबई, 5 सितंबर।
माखनचोरी और मटकी फोड़ की परंपरा के साथ मुंबई और आसपास के इलाकों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार पूरे उत्साह और पारंपरिक अंदाज में मनाया गया। शहर के अलग-अलग हिस्सों में गोविंदा पथकों की गूंज, ढोल-ताशों की थाप और ‘गोविंदा आला रे’ के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहा। हालांकि, दही हांडी फोड़ने के दौरान कई गोविंदाओं के घायल होने की घटनाएं भी सामने आईं।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अनुसार, इस वर्ष दही हांडी उत्सव के दौरान मुंबई और आसपास के उपनगरों में कुल 22 गोविंदा घायल हुए। इनमें से 21 को इलाज के बाद अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई, जबकि एक गोविंदा का उपचार अभी जारी है।
साउथ और सेंट्रल मुंबई में 20 गोविंदा घायल
दही हांडी फोड़ने के दौरान कई गोविंदाओं का मानव पिरामिड बनाते समय संतुलन बिगड़ गया और वे ऊंचाई से नीचे गिर गए। बीएमसी आपदा प्रबंधन कक्ष के आंकड़ों के मुताबिक, साउथ और सेंट्रल मुंबई में कुल 20 गोविंदा घायल हुए।
इन सभी गोविंदाओं को मामूली चोटें आईं। प्राथमिक उपचार और जरूरी चिकित्सकीय सहायता के बाद सभी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
पूर्वी उपनगर में एक घायल, पश्चिमी उपनगर में इलाज जारी
पूर्वी उपनगर में एक गोविंदा के घायल होने की सूचना मिली। इलाज के बाद उसे भी अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वहीं पश्चिमी उपनगर में घायल हुए एक अन्य गोविंदा का अस्पताल में उपचार जारी है। डॉक्टरों की टीम उसकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
बीएमसी ने अस्पतालों को रखा अलर्ट पर
दही हांडी के दौरान होने वाले हादसों को देखते हुए बीएमसी ने इस वर्ष स्वास्थ्य सेवाओं को हाई अलर्ट पर रखा था। बीएमसी स्वास्थ्य विभाग ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मुंबई और उपनगरों के नागरिक अस्पतालों में विशेष इंतजाम किए थे।
गोविंदाओं के लिए 105 बेड रिजर्व
घायल गोविंदाओं को तत्काल और मुफ्त उपचार उपलब्ध कराने के लिए बीएमसी ने कुल 105 बेड रिजर्व रखे थे। इसके अलावा उपनगरों के 16 नगर निगम अस्पतालों को भी अलर्ट पर रखा गया था।
मुंबई के तीन प्रमुख बीएमसी टीचिंग अस्पतालों—सायन स्थित लोकमान्य तिलक अस्पताल, परेल स्थित केईएम अस्पताल और मुंबई सेंट्रल स्थित नायर अस्पताल में भी विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। इन अस्पतालों में ट्रॉमा केयर और आर्थोपेडिक डॉक्टरों की विशेष टीमें तैनात रहीं। आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरी जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई थी।
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