विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान 49% मतदाताओं के नाम काटे गए: विधायक रईस शेख का आरोप

भाजपा के बूथ लेवल एजेंटों पर फॉर्म-7 के दुरुपयोग से 12 हजार से अधिक नाम हटाने की कोशिश का आरोप; चुनाव आयोग से नाम बहाल करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

न्यूज़म ब्यूरो

मुंबई, 15 अक्टूबर। भिवंडी पूर्व विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं होने का आरोप समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने लगाया है। उन्होंने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान क्षेत्र के 49 प्रतिशत मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। इस मामले में उन्होंने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) से शिकायत कर कथित रूप से अवैध तरीके से हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

3.76 लाख मतदाताओं में से 1.84 लाख के नाम हटाने का दावा

रईस शेख के अनुसार, SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले भिवंडी पूर्व विधानसभा क्षेत्र में कुल 3,76,138 मतदाता थे। इनमें से 1,91,097 मतदाताओं यानी लगभग 51 प्रतिशत का ही मैपिंग किया गया, जबकि 1,84,716 मतदाताओं यानी करीब 49 प्रतिशत के नाम हटाए जाने का दावा किया गया है।

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गुरुवार को इस मुद्दे पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विधायक ने पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से कथित अनियमितताओं का विवरण दिया और अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेज पेश करने की बात कही।

42 हजार से अधिक मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां

रईस शेख ने कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान 42,430 मतदाताओं से संबंधित विसंगतियां दर्ज की गईं। इनमें 25,230 मतदाताओं के रिकॉर्ड में अनियमितताएं सामने आईं, जबकि 17,200 मतदाताओं को मैपिंग प्रक्रिया से बाहर रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भिवंडी में रहने वाले कई मतदाताओं को गलत तरीके से स्थायी रूप से दूसरी जगह स्थानांतरित दिखाया गया।

विधायक के मुताबिक, कई मतदाताओं ने गणना प्रपत्र (Enumeration Form-EF) भरकर जमा किए थे, इसके बावजूद उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के पास रहने के दौरान कई प्रपत्र गायब हो गए।

फॉर्म-7 के दुरुपयोग का आरोप

रईस शेख ने आरोप लगाया कि भिवंडी पूर्व में स्थानीय निवासियों के खिलाफ फॉर्म-7 के माध्यम से आपत्तियां दर्ज कराई गईं। उनका दावा है कि कुछ आपत्तियां ऐसे लोगों ने दर्ज कराईं, जो संबंधित क्षेत्र के निवासी नहीं थे और न ही संबंधित मतदाताओं को जानते थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि एक विशेष राजनीतिक विचारधारा से जुड़े कार्यकर्ताओं ने मुस्लिम, दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के मतदाताओं को निशाना बनाने के लिए फॉर्म-7 का इस्तेमाल किया। उन्होंने भाजपा के बूथ लेवल एजेंटों पर भी फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग से 12 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

बूथ लेवल एजेंटों के नियमों में बदलाव पर सवाल

विधायक ने कहा कि अगस्त 2023 में बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त करने के लिए संबंधित क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम होना अनिवार्य था। इसके अलावा, एक एजेंट को प्रतिदिन अधिकतम 10 आवेदन जमा करने की अनुमति थी।

उनके अनुसार, 1 नवंबर 2025 को किए गए बदलाव के बाद संबंधित विधानसभा क्षेत्र में कहीं से भी BLA नियुक्त करने की अनुमति दी गई। रईस शेख का दावा है कि इस बदलाव के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की घटनाएं बढ़ीं और इसका असर दलित, मुस्लिम तथा आदिवासी मतदाताओं पर अधिक पड़ा।

नामों की बहाली और जांच की मांग

रईस शेख ने निर्वाचन आयोग से SIR प्रक्रिया के दौरान हटाए गए सभी नामों की समीक्षा कर उन्हें बहाल करने, कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

मतदाताओं को अपने नाम की स्थिति जांचने में मदद देने के लिए उनकी टीम ने raisshaikh137.mahatalent.org वेबसाइट तैयार की है। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर भी मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों और जमीनी स्थिति की जानकारी जुटाई।

हस्ताक्षर अभियान चलाने का दावा

रईस शेख ने कहा कि मतदाताओं में इस प्रक्रिया को लेकर नाराजगी है। उन्होंने बताया कि भिवंडी में कथित अनियमितताओं के विरोध में ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ प्रदर्शन किया गया और नागरिकों ने हस्ताक्षर अभियान भी चलाया। उनके अनुसार, इन हस्ताक्षरों वाला ज्ञापन जल्द ही महाराष्ट्र के राज्यपाल को सौंपा जाएगा।

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