महाराष्ट्र में खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी में 5% आरक्षण, फर्जी सर्टिफिकेट रोकने के लिए लागू होगा डिजिटल सिस्टम

कैबिनेट ने मेधावी खिलाड़ियों के लिए संशोधित नीति को दी मंजूरी, ग्रुप ए से डी तक की सीधी भर्ती में मिलेगा लाभ; योग्य खिलाड़ियों को 3 महीने में खेल प्रमाणपत्र का सत्यापन कराना होगा

Rahul Gupta
मुंबई, 10 सितंबर।

महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी नौकरियों में मेधावी खिलाड़ियों के लिए 5 प्रतिशत समानांतर आरक्षण की संशोधित नीति को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। नई नीति का उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को रोजगार के साथ सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा देना है।

इसके तहत पात्र खिलाड़ियों को अपने खेल प्रमाणपत्र का सत्यापन सरकारी आदेश जारी होने की तारीख से 3 महीने के भीतर पूरा करना होगा।

इन सरकारी नौकरियों में लागू होगा 5 प्रतिशत आरक्षण

खिलाड़ियों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण राज्य सरकार के विभागों और जिला परिषद, पंचायत समिति, ग्राम पंचायत, नगर निगम, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, बोर्ड, निगम और विश्वविद्यालयों में सीधी भर्ती पर लागू होगा।

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इसके अलावा सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों, आश्रम स्कूलों, सहकारी संस्थाओं, बैंकों, चीनी मिलों और राज्य से आर्थिक सहायता पाने वाले स्वैच्छिक संगठनों की ग्रुप ए, बी, सी और डी की नौकरियां भी इसके दायरे में आएंगी।

किन खिलाड़ियों को मिलेगा आरक्षण का लाभ?

नई नीति के तहत वर्ष 2005 के बाद लगातार कम से कम तीन समर ओलंपिक में शामिल रहे खेलों को पात्रता सूची में रखा गया है। महाराष्ट्र के पारंपरिक और क्षेत्रीय खेलों को बढ़ावा देने के लिए कबड्डी, खो-खो, शतरंज, मल्लखंब और क्रिकेट को भी सूची में शामिल किया गया है।

ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियन गेम्स, पैरा एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े बहु-खेल आयोजनों के मामले में यह शर्त लागू नहीं होगी। इन प्रतियोगिताओं में संबंधित वर्ष में शामिल कोई भी खेल पात्र माना जाएगा।

इन प्रतियोगिताओं के पदक विजेताओं को भी मिलेगा लाभ

मान्यता प्राप्त खेल संघों की सीनियर, यूथ और जूनियर प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ी भी आरक्षण के लिए पात्र होंगे। इसके अलावा स्कूल गेम्स अंडर-19, खेलो इंडिया यूथ, यूनिवर्सिटी और पैरा गेम्स तथा ऑल इंडिया इंटर-यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप के पदक विजेताओं को भी नीति के तहत लाभ मिलेगा।

फर्जी खेल प्रमाणपत्र रोकने के लिए डिजिटल सिस्टम

सरकार ने फर्जी खेल प्रमाणपत्रों पर रोक लगाने के लिए डिजिटल ‘स्पोर्ट्स ई-सर्टिफिकेट ऑटोमेशन सिस्टम’ शुरू करने का फैसला किया है। प्रतियोगिता आयोजकों को टूर्नामेंट समाप्त होने के 7 दिनों के भीतर डिजिटल हस्ताक्षर के साथ खिलाड़ियों के परिणाम इस सिस्टम पर अपलोड करने होंगे।

रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के लिए सिस्टम में ब्लॉकचेन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे रिकॉर्ड में बदलाव या छेड़छाड़ की संभावना कम होगी। क्रिप्टोग्राफिक हैशिंग के जरिए खेल प्रमाणपत्रों का सत्यापन भी किया जा सकेगा।

पुराने सरकारी आदेश होंगे रद्द

नई नीति लागू होने के बाद खिलाड़ियों के आरक्षण से जुड़े पहले के सभी सरकारी आदेश रद्द माने जाएंगे। राज्य सरकार जल्द ही संशोधित नियमों की पूरी जानकारी वाला नया सरकारी आदेश जारी करेगी।

पहले के सरकारी आदेशों के तहत पात्र उम्मीदवारों को भी नए सरकारी आदेश की तारीख से 3 महीने के भीतर अपने खेल प्रमाणपत्र का सत्यापन कराना होगा।

नई नीति में ये खेल मान्यता प्राप्त

नई नीति के तहत तीरंदाजी, एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बास्केटबॉल, बॉक्सिंग, कैनोइंग, कायाकिंग, क्रिकेट, साइकिलिंग, फेंसिंग, फुटबॉल, जिम्नास्टिक्स, हैंडबॉल, हॉकी, जूडो, कबड्डी, खो-खो, मल्लखंब, रोइंग, रग्बी, शूटिंग, तैराकी, टेबल टेनिस, ताइक्वांडो, ट्रायथलॉन, वॉलीबॉल, मॉडर्न पेंटाथलॉन, वेटलिफ्टिंग, कुश्ती, स्केटबोर्डिंग, सर्फिंग, स्पोर्ट क्लाइंबिंग, गोल्फ, शतरंज, घुड़सवारी, सेलिंग और टेनिस को शामिल किया गया है।

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