सीजेपी संस्थापक ने केंद्र सरकार पर विरोध की आवाज दबाने का आरोप लगाया; दिल्ली पुलिस ने हिरासत और पारिवारिक मुलाकात से जुड़े आरोपों पर अलग पक्ष रखा।
राहुल गुप्ता
छत्रपति संभाजीनगर, 13 अक्टूबर। दिल्ली के जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले पर विवाद खड़ा हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस फैसले की आलोचना करते हुए केंद्र सरकार पर विरोध की आवाज दबाने का आरोप लगाया है। उन्होंने आंदोलन जारी रखने की चेतावनी देते हुए कहा कि अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा।
दिपके ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर दावा किया कि सरकार को प्रदर्शन स्थल से नहीं, बल्कि लोगों के विरोध करने से परेशानी है। उन्होंने इस फैसले को लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार से जोड़ते हुए आंदोलन जारी रखने की बात कही।
प्रदर्शन के लिए तीन स्थलों का उल्लेख
खबर के अनुसार, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की ओर से 11 अक्टूबर को जारी स्थायी आदेश में विरोध प्रदर्शन और धरने के लिए तीन स्थान निर्धारित किए गए हैं। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान शामिल हैं।
जंतर-मंतर को सूची से हटाए जाने पर दिपके ने सवाल उठाए हैं। हालांकि, आदेश के पूरे पाठ और इस बदलाव के आधिकारिक कारणों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
लोकतंत्र को लेकर जताई आशंका
दिपके ने एक अन्य पोस्ट में आशंका जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का अगला कदम लोकतंत्र को खत्म करने की दिशा में हो सकता है। उन्होंने कहा कि यदि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाया जा सकता है, तो भविष्य में लोकतांत्रिक विरोध के अन्य रास्तों पर भी असर पड़ सकता है। ये दिपके के राजनीतिक आरोप और आशंकाएं हैं।
उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समर्थन को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। दिपके ने आरोप लगाया कि उनके समर्थन में कार्रवाई के दौरान युवाओं, पत्रकारों और विपक्षी सांसदों को निशाना बनाया जा रहा है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
हिरासत और दादी के निधन को लेकर भी आरोप
दिपके ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेने के दौरान उनके परिजनों और वकील को उनके ठिकाने की जानकारी नहीं दी। उन्होंने दावा किया कि दादी के निधन के बाद पुलिस ने उनके साथ मौजूद रिश्तेदार से फोन पर बात करने की अनुमति भी नहीं दी।
उन्होंने पुलिस पर मानसिक प्रताड़ना देने और संपादित वीडियो जारी करने का आरोप लगाते हुए पूरे घटनाक्रम का वीडियो सार्वजनिक करने की मांग की।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि दिपके को उनकी दादी के निधन की सूचना संवेदनशीलता के साथ दी गई थी। पुलिस के अनुसार, उन्हें अंतिम संस्कार के लिए घर जाने की पेशकश भी की गई थी, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। हिरासत से जुड़े दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
दिपके ने कहा कि उनकी लड़ाई कथित तानाशाही खत्म होने तक जारी रहेगी। जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले पर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने दोहराया कि अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा।
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