एफआरआरओ ने 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का दिया है निर्देश; अभिनेता ने नोटिस पर रोक और निर्वासन समेत किसी भी सख्त कार्रवाई से राहत मांगी।
राहुल गुप्ता
मुंबई, 17 अक्टूबर। अभिनेता इमरान खान ने भारत छोड़ने के नोटिस (एलआईएन) को चुनौती देते हुए शनिवार को बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की। यह नोटिस विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) ने 14 अक्टूबर को जारी किया था, जिसमें अभिनेता को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने के लिए कहा गया है। इमरान ने नोटिस को असंवैधानिक बताते हुए इसे रद्द करने और इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
यह नोटिस 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान के पास मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में जारी किया गया था। अधिकारियों ने इसे आव्रजन और विदेशी अधिनियम, 2025 के कथित उल्लंघन से जोड़ा है।
निर्वासन और अन्य कार्रवाई पर रोक की मांग
44 वर्षीय अभिनेता ने अदालत से अनुरोध किया है कि याचिका पर अंतिम फैसला आने तक नोटिस के संचालन और क्रियान्वयन पर रोक लगाई जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्वासन, लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) जारी करने, ब्लैकलिस्ट करने या उनके ओसीआई दर्जे के खिलाफ कार्रवाई करने से रोकने की भी मांग की है।
याचिका में कहा गया है कि नोटिस दुर्भावनापूर्ण तरीके से जारी किया गया और यह सत्ता का मनमाना तथा अत्यधिक अनुपातहीन इस्तेमाल है। अभिनेता के वकील सोमवार को मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए याचिका का उल्लेख कर सकते हैं।
ओसीआई दर्जे का हवाला
याचिका के मुताबिक, नोटिस में कारण स्पष्ट नहीं किए गए हैं और कानून के किस विशिष्ट प्रावधान का उल्लंघन हुआ, यह भी नहीं बताया गया। अभिनेता ने यह भी कहा कि नोटिस में उन्हें केवल अमेरिकी नागरिक बताया गया है, जबकि उनके ओसीआई दर्जे का उल्लेख नहीं किया गया।
इमरान के अनुसार, भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत उनका ओसीआई दर्जा भारत में आजीवन निवास से जुड़ा अधिकार प्रदान करता है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस पहलू की अनदेखी से पता चलता है कि अधिकारियों ने मामले पर उचित विचार नहीं किया।
बिना सुनवाई नोटिस जारी करने का आरोप
अभिनेता ने दावा किया कि नोटिस अंतिम आदेश की तरह जारी किया गया, जबकि उससे पहले कोई जांच, कारण बताओ नोटिस या अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया। याचिका में कहा गया है कि देश छोड़ने के लिए 14 दिन का समय देना सुनवाई के अधिकार का विकल्प नहीं हो सकता।
इमरान ने यह भी तर्क दिया कि सभा पर प्रतिबंध स्थानीय पुलिस के आदेश के तहत लगाया गया था, न कि आव्रजन और विदेशी अधिनियम, 2025 के तहत। उनके मुताबिक, प्रदर्शन स्थल केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित कोई संरक्षित या प्रतिबंधित स्थान भी नहीं था, इसलिए ओसीआई दर्जे की किसी शर्त का उल्लंघन नहीं हुआ।
याचिका में कहा गया है कि अभिनेता ने बैरिकेड वाले क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश नहीं की थी। पुलिस के जाने के लिए कहने पर वह अपनी कार की ओर लौट रहे थे। दावा है कि मीडिया कर्मियों के घेरने और उनसे प्रतिक्रिया मांगने के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।

हिरासत और जांच का हवाला
10 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान मुंबई पुलिस ने इमरान खान को हिरासत में लिया था। इसके बाद भाजपा नेता किरीट सोमैया ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि अमेरिकी नागरिक और ओसीआई कार्डधारक इमरान ने कानून का उल्लंघन किया है। पुलिस की ओर से एफआईआर भेजे जाने के बाद एफआरआरओ ने 14 अक्टूबर को भारत छोड़ने का नोटिस जारी किया।
अभिनेता ने याचिका में कहा कि रैली या विरोध प्रदर्शन में भाग लेना अपने आप में किसी विदेशी नागरिक या ओसीआई कार्डधारक के लिए प्रतिबंधित गतिविधि नहीं है। उन्होंने यह भी दलील दी कि जांच के अधीन और अभी साबित नहीं हुई एफआईआर के आधार पर किसी व्यक्ति को देश से बाहर जाने का निर्देश नहीं दिया जाना चाहिए।
याचिका के अनुसार, उसी शाम रिहा किए गए अभिनेता को भारत छोड़ने का निर्देश देना अनुपातहीन है। इमरान ने कहा है कि नोटिस लागू होने पर उन्हें ऐसा नुकसान हो सकता है जिसकी भरपाई संभव नहीं होगी। इन सभी दावों पर अदालत का फैसला आना बाकी है।
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