बारामती की सोमेश्वर सहकारी चीनी मिल के चुनाव में सुनेत्रा पवार के पैनल ने सभी 21 सीटें जीत लीं; विरोधी खेमों का खाता भी नहीं खुला।
राहुल गुप्ता
बारामती, 13 अक्टूबर। महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार के सामने अपनी राजनीतिक पकड़ साबित करने की चुनौती थी। पुणे जिले की बारामती स्थित सोमेश्वर सहकारी चीनी मिल का चुनाव इसी लिहाज से अहम माना जा रहा था। चुनाव से पहले अजित पवार के करीबी माने जाने वाले नेता ने उनका साथ छोड़ दिया था और मुकाबले में 3 पैनल मैदान में थे। ऐसे में सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाले पैनल की राह आसान नहीं मानी जा रही थी, लेकिन नतीजों ने पूरी तस्वीर बदल दी।
34 साल से चला आ रहा दबदबा बरकरार
सोमेश्वर सहकारी चीनी मिल पर पिछले 34 साल से अजित पवार के नेतृत्व वाले पैनल का दबदबा रहा है। उनके निधन के बाद यह पहला चुनाव था। इसलिए राजनीतिक हलकों में यह देखने पर नजरें थीं कि उनके बाद इस सहकारी संस्था पर किसका प्रभाव कायम रहेगा।
चुनाव की घोषणा के बाद अजित पवार के करीबी माने जाने वाले पुरुषोत्तम जगताप ने उनका साथ छोड़ दिया। उन्होंने भाजपा के पूर्व विधायक संजय जगताप के साथ हाथ मिला लिया। इससे सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाले पैनल के सामने चुनौती बढ़ गई। दूसरी ओर, युगेंद्र पवार ने शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की ओर से अपना पैनल उतारा। इस तरह चुनाव में 3 पैनलों के बीच मुकाबला हुआ।
सुनेत्रा पवार ने खुद संभाला प्रचार
बगावत और कड़े मुकाबले की आशंका के बीच सुनेत्रा पवार ने प्रचार के अंतिम चरण में खुद मोर्चा संभाला। वह पार्थ पवार और जय पवार के साथ गांव-गांव पहुंचीं, मतदाताओं से मुलाकात की और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के पैनल के पक्ष में मतदान करने की अपील की।
यह चुनाव केवल चीनी मिल के निदेशकों को चुनने तक सीमित नहीं था। अजित पवार के निधन के बाद यह भी परखा जा रहा था कि उनके करीबी नेताओं और समर्थकों के बीच सुनेत्रा पवार की कितनी पकड़ है। चुनाव से एक दिन पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के एक नगर अध्यक्ष पर मतदाताओं को पैसे बांटने का आरोप भी लगा था।
सभी 21 सीटों पर जीत, विरोधियों का खाता नहीं खुला
सुनेत्रा पवार ने पहले ही भरोसा जताया था कि बागी गुट का कोई भी निदेशक चुनाव नहीं जीत पाएगा। नतीजे आने पर उनके नेतृत्व वाले पैनल ने सभी 21 सीटों पर जीत दर्ज की। विरोधी पैनलों को एक भी सीट नहीं मिली।
जीत के बाद सभी 21 विजेता अजित पवार के स्मारक पर पहुंचे और अपनी जीत उन्हें समर्पित की। चुनाव परिणाम से संकेत मिला कि अजित पवार के निधन के बाद भी सोमेश्वर सहकारी चीनी मिल पर उनके पैनल का लंबे समय से चला आ रहा राजनीतिक दबदबा कायम है।
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