भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने ऑडियो क्लिप के आधार पर उठाए सवाल; राहुल गांधी से मांगा स्पष्टीकरण,कांग्रेस के संगठनात्मक रवैये पर उठाए सवाल
न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई, 12 अक्टूबर। दिल्ली में राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन में शामिल होने के लिए युवक कांग्रेस के पदाधिकारियों पर दबाव बनाए जाने का आरोप लगा है। भाजपा के महाराष्ट्र प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने सोमवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित पत्रकार परिषद में एक ऑडियो क्लिप का हवाला देते हुए यह मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र युवक कांग्रेस के पदाधिकारियों को दिल्ली पहुंचने के निर्देश दिए गए और ऐसा नहीं करने पर निलंबन तथा भविष्य में चुनाव लड़ने के अवसर प्रभावित होने की चेतावनी दी गई।
पदाधिकारियों को दिल्ली पहुंचने के निर्देश देने का दावा
नवनाथ बन के मुताबिक, युवक कांग्रेस के महासचिव एवं महाराष्ट्र प्रदेश प्रभारी अजय चिकारा ने पदाधिकारियों को अपने-अपने शहरों से दिल्ली पहुंचने के लिए कहा। बन ने दावा किया कि इस बातचीत में निर्देशों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। उन्होंने पत्रकार परिषद में संबंधित ऑडियो क्लिप का हवाला देते हुए कांग्रेस के संगठनात्मक कामकाज पर सवाल उठाए।
हालांकि, ऑडियो क्लिप की स्वतंत्र पुष्टि और बातचीत के पूरे संदर्भ की जानकारी सामने आना बाकी है। संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया के बिना इस मामले में लगाए गए आरोपों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
कांग्रेस के संगठनात्मक रवैये पर उठाए सवाल
बन ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व देश में तानाशाही का मुद्दा उठाता रहा है, ऐसे में पार्टी के भीतर पदाधिकारियों पर कथित दबाव बनाए जाने के आरोप गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने राहुल गांधी से इस मामले में स्पष्टीकरण देने की मांग की और पूछा कि क्या राजनीतिक आंदोलन में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए इस तरह के निर्देश देना उचित है।
उन्होंने यह भी आशंका जताई कि अन्य राज्यों में युवक कांग्रेस के पदाधिकारियों को इसी तरह के निर्देश दिए जा रहे हों। हालांकि, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के संदर्भ में उन्होंने किसी विशिष्ट घटना या स्वतंत्र प्रमाण का विवरण नहीं दिया।
विश्वजीत कदम के दिल्ली जाने का भी किया उल्लेख
भाजपा नेता ने पुणे में चल रहे एमपीएससी आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता विश्वजीत कदम आंदोलन के बीच में दिल्ली रवाना हुए थे। बन ने आशंका जताई कि उन्हें भी दिल्ली पहुंचने के लिए निर्देश मिले हो सकते हैं। हालांकि, कदम के दिल्ली जाने और कथित दबाव के बीच किसी संबंध की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
बन ने कहा कि यदि किसी आंदोलन में भागीदारी बढ़ाने के लिए पदाधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है, तो यह संगठनात्मक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की अपील की।
राहुल गांधी की राजनीति पर भाजपा का निशाना
पत्रकार परिषद में बन ने राहुल गांधी की राजनीतिक भूमिका और उनके विभिन्न संस्थानों के प्रति रुख की आलोचना भी की। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय, चुनाव आयोग और संविधान से जुड़े मुद्दों पर राहुल गांधी के बयानों को लेकर सवाल उठाए। साथ ही, उन्होंने पिछले लोकसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि जनता ने राहुल गांधी के नेतृत्व को पर्याप्त समर्थन नहीं दिया और आगामी चुनावों में भी कांग्रेस को चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
ये टिप्पणियां भाजपा नेता के राजनीतिक विचार और आरोप हैं। इन पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही दोनों पक्षों के दृष्टिकोण का आकलन किया जा सकेगा।
एमपीएससी आंदोलन वापस लिए जाने पर भी बोले बन
पुणे में एमपीएससी से संबंधित विद्यार्थियों का आंदोलन मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले की विद्यार्थियों से मुलाकात के बाद वापस लिए जाने का उल्लेख करते हुए बन ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शुरुआत से ही विद्यार्थियों की मांगों के प्रति सकारात्मक थे।
बन ने एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार के छुट्टी पर जाने के फैसले का भी स्वागत किया। उनके अनुसार, भीमनवार के कार्यकाल में पेपर लीक की कोई घटना नहीं हुई थी, फिर भी उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए यह निर्णय लिया। बन ने कहा कि विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों का समाधान संवाद के माध्यम से होना चाहिए और आंदोलन को राजनीतिक विवाद का विषय बनाने से बचना चाहिए।
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