महाराष्ट्र में गरबा में मुस्लिमों की एंट्री पर विवाद, VHP की रोक की मांग पर अमृता फडणवीस की अलग राय

VHP ने गरबा और डांडिया आयोजनों में मुस्लिमों को प्रवेश नहीं देने की अपील की, नितेश राणे ने किया समर्थन; अमृता फडणवीस बोलीं- त्योहार सभी को साथ लेकर चलने वाले होते हैं

Rahul Gupta

मुंबई, 9 सितंबर।

महाराष्ट्र में नवरात्रि से पहले गरबा और डांडिया आयोजनों में मुस्लिमों की एंट्री को लेकर विवाद तेज हो गया है। विश्व हिंदू परिषद यानी VHP ने मुस्लिमों को गरबा आयोजनों से दूर रखने की अपील की है। संगठन ने आयोजकों के लिए प्रतिभागियों के पहचान पत्र की जांच और तिलक लगाने जैसी शर्तों का भी सुझाव दिया है।

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और बीजेपी नेता नितेश राणे ने VHP की इस मांग का समर्थन किया है। वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने गरबा में मुसलमानों की एंट्री पर रोक का समर्थन नहीं किया है। उनके बयान के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।

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VHP ने मुस्लिमों की एंट्री रोकने की अपील की

VHP ने घोषणा की है कि 11 अक्टूबर से शुरू होने वाले नवरात्रि उत्सव के दौरान राज्यभर में आयोजित होने वाले गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में मुस्लिमों को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

संगठन की ओर से आयोजकों के लिए कुछ दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। इनमें प्रतिभागियों के आधार कार्ड की जांच करने और उनके माथे पर तिलक लगाने जैसे सुझाव शामिल हैं, ताकि आयोजनों में शामिल लोगों की पहचान सुनिश्चित की जा सके।

नितेश राणे ने VHP की मांग का किया समर्थन

महाराष्ट्र के मंत्री और बीजेपी नेता नितेश राणे ने VHP के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि गरबा और दूसरे हिंदू त्योहारों के दौरान कथित ‘लव जिहाद’ की घटनाएं होती हैं।

राणे का तर्क है कि जो लोग मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखते, उन्हें हिंदू धार्मिक आयोजनों में शामिल होने का अधिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने आयोजनों में प्रवेश से पहले आधार कार्ड की जांच के साथ हनुमान चालीसा का पाठ कराने जैसी शर्त का भी सुझाव दिया।

अमृता फडणवीस ने कहा- त्योहार सभी को साथ लेकर चलते हैं

नितेश राणे की राय से अलग मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने गरबा में मुस्लिमों की एंट्री पर रोक का समर्थन नहीं किया।

उन्होंने कहा कि त्योहार सभी को साथ लेकर चलने और सामूहिक रूप से मनाने के लिए होते हैं। अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति किसी उत्सव में शामिल होता है और शांतिपूर्वक उसका आनंद लेता है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

अमृता फडणवीस ने यह भी कहा कि सार्वजनिक आयोजनों में नियमों का पालन होना चाहिए और किसी दूसरे व्यक्ति को परेशानी नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि किसी भी जाति या धर्म का व्यक्ति शांतिपूर्वक गरबा देखने या उसमें शामिल होने आता है तो इसे गलत नहीं माना जाना चाहिए।

बीजेपी के भीतर भी अलग-अलग राय

गरबा में मुस्लिमों की एंट्री को लेकर बीजेपी और उससे जुड़े नेताओं के बीच भी अलग-अलग राय सामने आ रही है। नितेश राणे जहां VHP की मांग के समर्थन में हैं, वहीं अमृता फडणवीस ने समावेशी आयोजन की बात कही है।

महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार भी गरबा आयोजनों को समावेशी रखने की बात कह चुके हैं। ऐसे में नवरात्रि से पहले यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है।

‘लव जिहाद’ को लेकर क्या है राणे का तर्क?

नितेश राणे ने आरोप लगाया है कि गरबा और दूसरे हिंदू त्योहारों के दौरान ‘लव जिहाद’ के मामले बढ़ जाते हैं। उन्होंने आयोजनों में आने वाले लोगों की पहचान की जांच की मांग की है।

राणे ने प्रवेश से पहले लोगों से हनुमान चालीसा का पाठ कराने का भी सुझाव दिया है। उनका कहना है कि जो लोग हिंदू धार्मिक परंपराओं और मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखते, उन्हें ऐसे धार्मिक आयोजनों में शामिल नहीं होना चाहिए।

क्या है ‘लव जिहाद’ शब्द का मतलब?

‘लव जिहाद’ दक्षिणपंथी संगठनों और कार्यकर्ताओं द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है। इसके तहत आरोप लगाया जाता है कि मुस्लिम पुरुष हिंदू महिलाओं को प्रेम के जाल में फंसाकर उनका धर्म परिवर्तन कराने की साजिश करते हैं।

गरबा आयोजनों को लेकर भी इसी तरह के आरोपों का हवाला देते हुए मुस्लिमों की एंट्री पर रोक और पहचान जांच जैसी मांगें उठाई जा रही हैं। वहीं दूसरी ओर, अमृता फडणवीस समेत कुछ नेताओं ने त्योहारों में सभी समुदायों की शांतिपूर्ण भागीदारी का समर्थन किया है।

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