मसालों की खुली बिक्री पर रोक, छोटी दुकानों के सामने नई चुनौती; ग्राहकों की जेब पर भी पड़ सकता है असर

राहुल गुप्ता

मुंबई, 17 अक्टूबर। महाराष्ट्र में खुले और बिना पैकिंग वाले मसाला पाउडर की बिक्री पर रोक लगाने के फैसले से व्यापारियों के बीच चिंता बढ़ गई है। कुछ कारोबारी इसे मिलावट रोकने की दिशा में जरूरी कदम मान रहे हैं, जबकि दूसरे व्यापारियों का कहना है कि पैकेजिंग की अतिरिक्त लागत से कीमतें बढ़ सकती हैं और पारंपरिक कारोबार प्रभावित हो सकता है।

मुंबई के करीब 100 साल पुराने लालबाग मसाला बाजार में पीढ़ियों से ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मसाले खरीदते रहे हैं। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के 15 अक्टूबर के आदेश के बाद अब इस परंपरागत कारोबार को नए नियमों के अनुसार ढालने की चुनौती सामने आई है।

छोटी मात्रा में मसाले खरीदने वालों के सामने परेशानी

न्यू लालबाग मार्केट्स मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत गायकवाड़ ने कहा कि व्यापारी मिलावट रोकने के उद्देश्य का समर्थन करते हैं, लेकिन नियमों को लागू करने के तरीके पर स्पष्टता जरूरी है।

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उनके मुताबिक, कई ग्राहक सिर्फ 10 ग्राम मसाला खरीदना चाहते हैं, जबकि पैकेटबंद उत्पाद 50 ग्राम या उससे अधिक मात्रा में मिल सकते हैं। इससे ग्राहकों की जरूरत और खरीदारी के खर्च पर असर पड़ सकता है।

गायकवाड़ ने कहा कि सफाई, प्रसंस्करण और सीलिंग के कारण पैकेजिंग की लागत बढ़ेगी। हालांकि, इससे उत्पादों की जानकारी में पारदर्शिता आ सकती है और बड़ी कंपनियों को भी बाजार में कारोबार बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।

एसोसिएशन के अनुसार, लालबाग में करीब 150 पंजीकृत मसाला व्यापारी हैं। इसके अलावा लगभग 100 अपंजीकृत कारोबारी भी इस क्षेत्र में काम करते हैं। संगठन ने नियमों को लागू करने से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं पर स्थानीय खाद्य निरीक्षक से चर्चा शुरू की है।

व्यापारियों ने पैकेजिंग की लागत पर उठाए सवाल

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एचबी राठौड़ मसाला के नरेश राठौड़ का कहना है कि हर मसाले को पैक करने और प्रत्येक पैकेट पर जरूरी जानकारी देने से खर्च बढ़ेगा। इसका असर ग्राहकों की जेब पर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ताजे पिसे मसालों को एयरटाइट डिब्बों में रखने पर करीब एक साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

राठौड़ ने पैकेटबंद मसालों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए। उनका तर्क है कि नियामक एजेंसियों को ब्रांडेड मसालों में संभावित संदूषण की शिकायतों पर भी ध्यान देना चाहिए।

वहीं, 80 वर्षीय गुलाब ट्रेडर्स के मालिक यूसुफ कपासी ने अपने कारोबार के लिए हर उत्पाद की पैकेजिंग को व्यावहारिक रूप से बेहद मुश्किल बताया। उन्होंने कहा कि कार्रवाई का मुख्य ध्यान उन विक्रेताओं पर होना चाहिए, जो मसालों में मिलावट के लिए हानिकारक रसायनों और रंगों का इस्तेमाल करते हैं।

पीढ़ियों से कायम है दुकानदारों पर ग्राहकों का भरोसा

कपासी के मुताबिक, महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों से ग्राहक उनके यहां मसाले खरीदने आते हैं। पुणे से आए एक ग्राहक ने बताया कि उनके परिवार का इस दुकान से पुराना रिश्ता है। पहले उनकी मां यहां से मसाले खरीदती थीं और अब उनकी पत्नी भी मुंबई आने पर इसी दुकान से खरीदारी करने को कहती हैं।

करीब 100 साल पुराने विवेक स्टोर्स के चंद्रकांत जाधव ने कहा कि उनकी दुकान पर खुले मसालों को साफ-सफाई के साथ पीसकर एयरटाइट जार में रखा जाता है। उनका मानना है कि यदि सभी मसाले पैकेट में बेचे जाएंगे, तो ग्राहक अपनी पसंद के मुताबिक मात्रा नहीं चुन पाएंगे और उत्पाद की गुणवत्ता को पहले की तरह परखना भी मुश्किल होगा।

छोटे कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का सवाल

शिंदराज मसाला के सचिन शिंदे ने बताया कि उनका कारोबार 1962 से चल रहा है। नए नियमों के तहत पैकेजिंग, लेबलिंग और अतिरिक्त कर्मचारियों पर खर्च करना पड़ सकता है। छोटे निर्माताओं के लिए यह आर्थिक बोझ संभालना मुश्किल हो सकता है।

दादर में मसाला पाउडर बेचने वाले एक ठेला विक्रेता ने भी अपनी चिंता जाहिर की। उसने कहा कि यही उसका रोजी-रोटी कमाने का साधन है और अगर यह काम बंद करना पड़ा, तो मुंबई जैसे शहर में गुजारा करना मुश्किल हो जाएगा।

क्या है एफडीए का नया आदेश?

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन के 15 अक्टूबर के आदेश के मुताबिक, मसाला पाउडर और मिश्रित मसालों को खुले और बिना पैकिंग के बेचने पर रोक लगाई गई है। आदेश में इनके वितरण और बिक्री से पहले उत्पादन स्थल पर ही मसालों को पैक करके सील करना अनिवार्य किया गया है।

इस फैसले का उद्देश्य मसालों की बिक्री में सुरक्षा और निगरानी से जुड़ी व्यवस्था को मजबूत करना है। हालांकि, व्यापारियों का कहना है कि नियम लागू करते समय छोटे दुकानदारों की आर्थिक स्थिति, ग्राहकों की जरूरत और पारंपरिक बाजारों की कार्यप्रणाली को भी ध्यान में रखना जरूरी होगा।

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