जालना में मनोज जरांगे के करीबी को बड़ा झटका, 4.90 करोड़ के जुर्माने से राहत देने वाला आदेश रद्द; जानें क्या है पूरा मामला

राहुल गुप्ता
जालना, 28 सितंबर। जालना के अंबड तालुका में गोदावरी नदी से अवैध रेत उत्खनन के मामले में राजस्व विभाग ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। विभाग ने संजय नानासाहेब कटारे को दंडात्मक कार्रवाई से बाहर रखने वाले तत्कालीन तहसीलदार के संशोधित आदेश को रद्द कर दिया है। कटारे को मनोज जरांगे का सहयोगी बताया जाता है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, आदेश रद्द होने के बाद पहले लगाया गया करीब 4.90 करोड़ रुपये का दंड और संपत्ति पर दर्ज भार फिर से प्रभावी हो गया है। अंबड के उपविभागीय अधिकारी उमाकांत पारधी ने संशोधित आदेश रद्द किया है। जालना जिला प्रशासन की वेबसाइट पर उमाकांत पारधी को अंबड के उपविभागीय अधिकारी के रूप में दर्ज किया गया है।

2000 ब्रास अवैध रेत उत्खनन का मामला

यह मामला अंबड तालुका के साष्ट पिंपलगांव और डोमलगांव क्षेत्र में गोदावरी नदी के पात्र से करीब 2000 ब्रास अवैध रेत उत्खनन से जुड़ा है। 24 मार्च 2023 को तलाठी और मंडल अधिकारी की संयुक्त टीम ने मामले का पंचनामा किया था।

पंचनामे के आधार पर तत्कालीन तहसीलदार ने महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता के तहत 18 लोगों पर कुल 4 करोड़ 90 लाख 72 हजार 200 रुपये का दंड लगाया था। साथ ही संबंधित स्थावर संपत्ति पर इस राशि का भार दर्ज करने की कार्रवाई की गई थी।

संशोधित आदेश से हटाया गया था दंड

बाद में तत्कालीन तहसीलदार की ओर से एक संशोधित आदेश जारी किया गया था, जिसमें संजय नानासाहेब कटारे को दंडात्मक कार्रवाई से बाहर रखा गया था। अब अंबड के उपविभागीय अधिकारी ने इस संशोधित आदेश को रद्द कर दिया है।

आदेश रद्द होने के बाद मूल दंडात्मक आदेश बहाल होने की बात सामने आई है। इसके तहत गट नंबर 265 पर दर्ज संपत्ति भार भी कायम रहेगा।

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महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता के तहत कार्रवाई

रिपोर्ट के मुताबिक, करीब तीन साल पहले किए गए पंचनामे के आधार पर महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता, 1966 की धारा 48(7) और 48(8) के तहत अवैध गौण खनिज उत्खनन के मामले में दंडात्मक वसूली के आदेश दिए गए थे। महाराष्ट्र सरकार ने भी अवैध रेत और अन्य गौण खनिजों के उत्खनन, उपयोग और परिवहन के खिलाफ संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।

हालांकि, इस मामले में संजय कटारे की ओर से कोई अलग पक्ष या प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। ऐसे में उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को प्रशासनिक कार्रवाई और उपलब्ध रिपोर्ट के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

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