मुंबई हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने करीब छह साल पुराने मामले में प्राथमिकी दर्ज की, महाराष्ट्र सरकार ने कहा- जांच अदालत के निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ रही है
राहुल गुप्ता
मुंबई, 15 सितंबर।
दिशा सालियान मौत मामले में करीब छह साल बाद जांच का नया अध्याय शुरू हो गया है। मुंबई हाईकोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। हालांकि, एजेंसी ने अभी किसी भी व्यक्ति को आरोपी के तौर पर नामजद नहीं किया है।
सीबीआई की इस कार्रवाई के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार का कहना है कि जांच अदालत के निर्देशों के मुताबिक आगे बढ़ रही है, जबकि विपक्ष ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। मामले को लेकर बीजेपी और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गया है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुई FIR
दिशा सालियान की मौत के मामले में 2 सितंबर को मुंबई हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। अदालत ने करीब छह साल तक प्राथमिकी दर्ज नहीं किए जाने को लेकर मुंबई पुलिस को फटकार भी लगाई थी।
इसके बाद सीबीआई ने 13 सितंबर को औपचारिक रूप से एफआईआर दर्ज की। अधिकारियों के मुताबिक, अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए फिलहाल किसी भी व्यक्ति को नामजद आरोपी नहीं बनाया गया है।
अब सीबीआई मामले से जुड़े तथ्यों, परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करेगी। जांच आगे बढ़ने के साथ किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आने पर उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
महाराष्ट्र सरकार ने क्या कहा?
महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने कहा कि पूरा मामला अब सीबीआई को सौंप दिया गया है और जांच न्यायालय के निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि जांच में जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध है या जिनसे पूछताछ और जांच जरूरी है, उनके खिलाफ नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। कदम के मुताबिक, जांच और आगे की सभी कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए की जा रही है।
सुप्रिया सुले ने उठाए सवाल
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने दिशा सालियान मामले में एफआईआर दर्ज होने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यही सरकार पहले इस मामले को बंद कर चुकी थी, ऐसे में अब दोबारा जांच शुरू होने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सुप्रिया सुले ने कहा कि पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए वह शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता संजय राऊत से भी बातचीत करेंगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ करने की प्रवृत्ति पहले भी देखने को मिली है और इस मामले में भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
बीजेपी ने जांच पर जताया भरोसा
बीजेपी नेता और मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि मामला न्यायालय के विचाराधीन है, इसलिए इस पर ज्यादा बोलना उचित नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि जांच से सच्चाई सामने आ जाएगी और दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा। बीजेपी का कहना है कि जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से अपना काम करने देना चाहिए।
इस मामले में सीबीआई की एफआईआर के बाद अब जांच की दिशा पर सभी की नजर है। फिलहाल एजेंसी ने किसी व्यक्ति को आरोपी के तौर पर नामजद नहीं किया है।
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