एसआईआर पर कांग्रेस का रुख राज्यों के हिसाब से बदलता है: नवनाथ बन

केरल में प्रक्रिया की सराहना और महाराष्ट्र में विरोध पर भाजपा प्रवक्ता ने उठाए सवाल

न्यूज़म ब्यूरो

मुंबई, 10 अक्टूबर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता नवनाथ बन ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को एसआईआर पर अपने रुख की समीक्षा करनी चाहिए। बन के मुताबिक, एक ही प्रक्रिया को अलग-अलग राज्यों में अलग नजरिये से देखना कांग्रेस की राजनीतिक भूमिका पर सवाल खड़े करता है।

केरल में समर्थन, महाराष्ट्र में विरोध क्यों?

भाजपा प्रदेश कार्यालय में शनिवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए बन ने कहा कि कांग्रेस ने एसआईआर को लेकर विभिन्न राज्यों में अलग-अलग रुख अपनाया है। उन्होंने दावा किया कि केरल में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने इसकी सराहना की थी। ऐसे में महाराष्ट्र में इसी प्रक्रिया का विरोध क्यों किया जा रहा है?

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बन ने तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए भी कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि एसआईआर के बाद तमिलनाडु में विपक्षी दल को जीत मिली और केरल में कांग्रेस को सफलता हासिल हुई, तो चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाने का आधार क्या है?

मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों का दिया हवाला

भाजपा प्रवक्ता ने चुनाव आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में कुल 95 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 82 करोड़ यानी करीब 88 प्रतिशत मतदाताओं की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उनके अनुसार, शेष 13 करोड़ नामों में प्रवासी मतदाताओं, दोहरे पंजीकरण और मृत मतदाताओं से संबंधित मामले शामिल थे।

बन ने दावा किया कि लगभग 2.89 करोड़ मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी थी, जबकि करीब 1.1 करोड़ मतदाताओं के नाम दो स्थानों पर दर्ज थे। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने जानबूझकर किसी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया है।

छूटे नामों के लिए फॉर्म-6 का विकल्प

नवनाथ बन ने कहा कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं, वे फॉर्म-6 भरकर अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को अलग-अलग राज्यों में अपने रुख में एकरूपता रखनी चाहिए।

हालांकि, मतदाता सूची से संबंधित आंकड़ों और दावों पर चुनाव आयोग के आधिकारिक विवरण के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।

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