आंदोलनकारियों की मांग- आजाद मैदान में प्रदर्शन की अनुमति दें या राज्यपाल से मिलने दिया जाए; कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई, 6 अक्टूबर। आदिवासी विद्यार्थियों की विभिन्न मांगों को लेकर नासिक से मुंबई पहुंचे छात्रों के आंदोलन को लेकर मंगलवार को विवाद बढ़ गया। छात्रों का दावा है कि उन्हें आजाद मैदान में आंदोलन की अनुमति नहीं दी गई और उन्हें राज्यपाल से मिलने का अवसर भी नहीं दिया गया। इसके बाद मुंबई के टिळक भवन में ठहरे कई छात्रों को पुलिस ने हिरासत में लिया। हालांकि, पुलिस ने कांग्रेस कार्यालय में घुसकर छात्रों को गिरफ्तार करने के आरोप से इनकार किया है।
48 दिनों से आंदोलन का दावा
आदिवासी छात्रों के अनुसार, वे आश्रमशालाओं और छात्रावासों में शिक्षा, भोजन, पानी, बिजली, शौचालय और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि वे नासिक से मुंबई तक पैदल मार्च कर अपनी मांगें सरकार के सामने रखने आए हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सैकड़ों छात्र मुंबई पहुंचे हैं और आजाद मैदान में प्रदर्शन करना चाहते थे।
आश्रमशालाओं में सुविधाओं का मुद्दा
छात्रों ने आश्रमशालाओं में कथित अव्यवस्थाओं की जांच कराने, बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने और भोजन की गुणवत्ता में सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि केंद्रीय रसोई से मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। छात्रों ने संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और आदिवासी विद्यार्थियों की समस्याओं पर तत्काल ध्यान देने की मांग की है।
छात्रों ने कहा कि वे अपनी समस्याएं सरकार के समक्ष शांतिपूर्ण तरीके से रखना चाहते हैं। उनकी मांग है कि उन्हें आजाद मैदान में आंदोलन करने की अनुमति दी जाए या फिर राज्यपाल से मुलाकात का अवसर दिया जाए।
टिळक भवन के बाहर भारी पुलिस बंदोबस्त

मुंबई पहुंचने के बाद कुछ आदिवासी छात्रों ने दादर स्थित महाराष्ट्र कांग्रेस के टिळक भवन कार्यालय में ठहरने की व्यवस्था की थी। इसके बाद कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए। छात्रों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें आंदोलन स्थल तक जाने से रोकने का प्रयास किया और कुछ छात्रों को हिरासत में लिया।
कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल किया गया। पार्टी ने टिळक भवन में पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों की मांगों के समर्थन में कांग्रेस उनके साथ खड़ी है।
हालांकि, इस मामले में पुलिस का पक्ष अलग है। मुंबई पुलिस ने कांग्रेस कार्यालय में प्रवेश कर छात्रों को गिरफ्तार किए जाने के आरोप को खारिज किया है। ऐसे में टिळक भवन में हुई कार्रवाई को लेकर कांग्रेस और पुलिस के दावों में अंतर सामने आया है।
राहुल गांधी ने दिया समर्थन
कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी आदिवासी विद्यार्थियों की मांगों का समर्थन किया है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह विद्यार्थियों की समस्याओं को लेकर उनके साथ खड़ी रहेगी और उनकी मांगों को सरकार के सामने उठाती रहेगी।
सरकार के सामने छात्रावास व्यवस्था सुधारने की चुनौती
इस आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने आदिवासी विद्यार्थियों के छात्रावासों और सुविधाओं की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की है। समिति को विभिन्न योजनाओं और छात्र सुविधाओं का अध्ययन कर 30 अक्टूबर 2026 तक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।
आंदोलन के चलते अब छात्रों की मांगों, उनके प्रदर्शन की अनुमति और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार तथा विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
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