वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय में छात्रों पर कार्रवाई को लेकर विवाद

सुजात आंबेडकर ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग

रीमा सिंह

वर्धा, 15 सितंबर।

वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में दलित, आदिवासी और ओबीसी विद्यार्थियों की विभिन्न मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन ने राजनीतिक रूप ले लिया है। वंचित बहुजन आघाड़ी के युवा नेता सुजात आंबेडकर ने आरोप लगाया है कि विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें छात्रावास से बाहर कर दिया। उन्होंने इस कार्रवाई को कथित तौर पर ब्राह्मणवादी और मनुवादी प्रवृत्ति का परिचायक बताया है।

मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग

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सुजात आंबेडकर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की मांगें और उनका शैक्षणिक भविष्य गंभीर विषय हैं। राज्य सरकार को केंद्र सरकार के स्तर पर भी इस मामले को उठाना चाहिए।

दो महीने से आंदोलन कर रहे विद्यार्थी

आंबेडकर के अनुसार, विद्यार्थी पिछले दो महीने से अधिक समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इनमें बेहतर मेस सुविधा, स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल, 24 घंटे पुस्तकालय की सुविधा, लंबित पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया पूरी करना, शैक्षणिक विभागों को पूर्ववत करना और प्रशासनिक उपेक्षा समाप्त करना प्रमुख हैं।
आंबेडकर का आरोप है कि इन मांगों पर गंभीरता से विचार करने के बजाय विश्वविद्यालय प्रशासन ने आंदोलनकारी विद्यार्थियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की और उन्हें छात्रावास से बाहर कर दिया। उन्होंने दावा किया कि विद्यार्थियों को सम्मानपूर्वक शिक्षा प्राप्त करने के अधिकार से वंचित करने के लिए जाति का इस्तेमाल किया जा रहा है।

‘जय भीम, जय संविधान’ बोलना कब से अपराध?

सुजात आंबेडकर ने विश्वविद्यालय में दलित, आदिवासी और ओबीसी विद्यार्थियों के कथित जातीय उत्पीड़न का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि विद्यार्थियों को ‘जय भीम, जय संविधान’ के नारे लगाने तथा बिरसा मुंडा, महात्मा ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती जैसे कार्यक्रम आयोजित करने से रोका जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि भारत में ‘जय भीम, जय संविधान’ कहना और महापुरुषों के उत्सव मनाना कब से अपराध हो गया?

केंद्रीय स्तर पर हस्तक्षेप की मांग

10 सितंबर को सुजात आंबेडकर ने वंचित बहुजन युवा आघाड़ी और सम्यक विद्यार्थी आंदोलन के पदाधिकारियों के साथ वर्धा पहुंचकर आंदोलनकारी विद्यार्थियों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी से संपर्क कर केंद्र स्तर पर समाधान निकालने की मांग भी की है।

आंबेडकर ने विद्यार्थियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने, उनकी जायज मांगों को पूरा करने और उनके शैक्षणिक भविष्य में किसी तरह की बाधा नहीं आने देने की सरकार से मांग की है।

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