साहिल वाकोडे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग

23 सितंबर को IIT बॉम्बे के डीन से मिलेंगे सुजात आंबेडकर

रीमा सिंह

मुंबई, 22 सितंबर।

IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में वंचित बहुजन आघाड़ी के युवा नेता सुजात आंबेडकर ने निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने कहा है कि 23 सितंबर को वे IIT बॉम्बे पहुंचकर संस्थान के डीन से मामले को लेकर जवाब मांगेंगे।

संस्थान के बयान पर उठाए सवाल

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सुजात आंबेडकर ने ‘एक्स’ पर जारी पोस्ट में कहा कि IIT बॉम्बे जांच एजेंसी नहीं है। उनके अनुसार, स्वतंत्र जांच पूरी होने से पहले ही छात्र की मौत को परीक्षा में कथित अनियमितता से जोड़कर सार्वजनिक बयान जारी करना उचित नहीं था। उन्होंने कहा कि इस तरह के शुरुआती बयान से मामले को लेकर एक धारणा बन सकती है और जांच प्रभावित होने की आशंका पैदा हो सकती है।

मामले में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच जांच कर रही है। जांच एजेंसियां परीक्षा कक्ष, परिसर और हॉस्टल के सीसीटीवी फुटेज के जरिए साहिल की गतिविधियों और घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही हैं।

जातिगत भेदभाव के आरोपों की भी जांच की मांग

सुजात आंबेडकर ने साहिल के परिवार की ओर से लगाए गए जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की है। IIT बॉम्बे ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि साहिल की ओर से एससी-एसटी सेल या प्रशासन के समक्ष ऐसी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी।

वहीं, साहिल के परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है और जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है।

23 सितंबर को IIT बॉम्बे पहुंचेंगे

सुजात आंबेडकर के अनुसार, वे 23 सितंबर को शाम 4 बजे IIT बॉम्बे के डीन से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे संस्थान की ओर से जारी शुरुआती बयान, मामले की जांच और साहिल के परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर जवाब मांगेंगे।

इस बीच, IIT बॉम्बे ने 21 सितंबर को प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला को डीन के पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया था। संस्थान ने अपने पूर्व संचार पर खेद जताते हुए कहा था कि साहिल की मौत से जुड़े घटनाक्रम की जांच जारी है।

सुजात आंबेडकर ने जांच से जुड़े साक्ष्यों को सुरक्षित रखने, सभी आरोपों की पड़ताल करने और संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले परीक्षा में कथित नकल या आरक्षण से जुड़े मुद्दों को मामले का अंतिम आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।

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