14 फीट से अधिक ऊंचाई वाली 39,111 झोपड़ियों पर प्रस्तावित कार्रवाई रोकने की मांग

वर्षा गायकवाड ने बीएमसी आयुक्त को पत्र लिखकर पुनर्वास के बाद कार्रवाई की मांग की

मुंबई, 28 सितंबर। मुंबई में 14 फीट से अधिक ऊंचाई वाली झोपड़ियों के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद प्रो. वर्षा एकनाथ गायकवाड ने बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे को पत्र लिखा है। उन्होंने 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 के बीच प्रस्तावित कार्रवाई को तत्काल स्थगित करने की मांग की है।

त्योहारों के दौरान कार्रवाई पर उठाए सवाल

गायकवाड ने पत्र में कहा कि प्रस्तावित तीन महीने की अवधि में नवरात्र, दशहरा और दिवाली जैसे महत्वपूर्ण त्योहार हैं। ऐसे समय में बड़ी संख्या में झोपड़ियों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू करने की जरूरत पर उन्होंने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मुंबई में लाखों गरीब और मेहनतकश लोग झोपड़पट्टियों में रहते हैं और शहर की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

14 फीट के मानदंड पर जताई आपत्ति

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पत्र में बीएमसी के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि शहर में कुल 2 लाख 23 हजार 150 झोपड़ियों में से 39 हजार 111 झोपड़ियां 14 फीट से अधिक ऊंचाई की हैं। पत्र में पूर्व उपनगरों के आंकड़े को लेकर भी उल्लेख किया गया है। गायकवाड ने कहा कि केवल ऊंचाई के आधार पर सभी संरचनाओं के खिलाफ एकसमान कार्रवाई करने के बजाय वास्तव में खतरनाक संरचनाओं और पुनर्विकास के माध्यम से समाधान योग्य संरचनाओं में स्पष्ट अंतर किया जाना चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब बीएमसी ने पहले 18 फीट तक की झोपड़ियों को संरक्षण देने की भूमिका अपनाई थी, तो अब 14 फीट से अधिक ऊंचाई वाली संरचनाओं पर कार्रवाई का निर्णय क्यों लिया गया है।

पहले पुनर्वास, फिर कार्रवाई की मांग

गायकवाड ने कहा कि वे खतरनाक या अनधिकृत निर्माण का समर्थन नहीं करतीं, लेकिन प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के बाद ही कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुंबई में एसआरए, म्हाडा, पीएपी और क्लस्टर पुनर्विकास जैसी पुनर्वास व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। इसलिए पहले पात्र परिवारों की पहचान कर उनके लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की जानी चाहिए और इसके बाद संबंधित बस्तियों के पुनर्विकास की योजना तैयार की जानी चाहिए।

पांच प्रमुख मांगें

गायकवाड ने बीएमसी से 14 फीट के मानदंड पर आधारित प्रस्तावित कार्रवाई तत्काल स्थगित करने, प्रभावित बस्तियों के पुनर्वास और पुनर्विकास की ठोस योजना बनाने तथा परिवारों को विस्थापित करने से पहले वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने की मांग की है।

उन्होंने आवश्यकतानुसार संरचनाओं का सुरक्षा एवं स्ट्रक्चरल ऑडिट कर केवल वास्तव में खतरनाक निर्माण पर कार्रवाई करने और पुनर्वास, पुनर्विकास तथा कार्रवाई की पूरी योजना लोकप्रतिनिधियों के समक्ष चर्चा के लिए रखने की भी मांग की।

पत्र के अंत में गायकवाड ने कहा कि मुंबई को झोपड़पट्टी मुक्त करने का रास्ता गरीबों को बेघर करना नहीं, बल्कि पुनर्वास और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना होना चाहिए।

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