मराठा समाज को भर-भरकर देने वाले फडणवीस की आलोचना न करें

रीमा सिंह

मुंबई, 10 सितंबर।

अण्णासाहेब पाटील आर्थिक रूप से पिछड़ा विकास महामंडल के अध्यक्ष नरेंद्र अण्णासाहेब पाटील ने मराठा आंदोलनकारियों से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में देवेंद्र फडणवीस ने मराठा समाज के लिए जितना संभव था, उससे कहीं अधिक काम किया है। ऐसे में फडणवीस तथा सरकार के अन्य नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करना उचित नहीं है।

1.80 लाख लाभार्थियों तक पहुंचा महामंडल

भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार परिषद में नरेंद्र पाटील ने कहा कि सरकार के मजबूत समर्थन के कारण अण्णासाहेब पाटील आर्थिक रूप से पिछड़ा विकास महामंडल के लाभार्थियों की संख्या बढ़कर करीब 1.80 लाख हो गई है। वर्ष 2018 से अब तक महामंडल को करीब 2,000 करोड़ रुपये का निधि उपलब्ध कराया गया है। इसके माध्यम से मराठा समाज के युवाओं को उद्यम के लिए आर्थिक सहायता और बैंक ऋण पर ब्याज में मदद दी जा रही है।

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आरक्षण के लिए विशेष समिति का गठन

पाटील ने कहा कि 2016 में मराठा समाज के बड़े पैमाने पर मूक मोर्चे निकले थे। मुंबई में हुए महामोर्चे के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विशेष समिति गठित कर कानून के दायरे में मराठा समाज को आरक्षण देने की दिशा में प्रयास किए। साथ ही मराठा युवाओं को उद्यमी बनाने के लिए महामंडल की नियमावली में बदलाव किया गया और शैक्षणिक सहायता के लिए सारथी संस्था की स्थापना की गई।

सारथी से शिक्षा और प्रशिक्षण को बढ़ावा

उन्होंने बताया कि सारथी के माध्यम से छत्रपति शिवाजी महाराज और छत्रपति राजाराम महाराज छात्रवृत्ति सहित विभिन्न योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को मिला है। विदेश में उच्च शिक्षा, यूपीएससी-एमपीएससी की तैयारी तथा उद्यमिता प्रशिक्षण के लिए भी सहायता दी जा रही है। महामंडल के सात संभागीय कार्यालय स्थापित किए गए हैं।

आंदोलन में संयम जरूरी

नरेंद्र पाटील ने कहा कि कुछ आंदोलनकारी देवेंद्र फडणवीस, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले और राधाकृष्ण विखे पाटील के खिलाफ जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह मराठा समाज की परंपरा के अनुरूप नहीं है। त्योहारों के दौरान आंदोलन को उग्र रूप देना भी उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने समाज के लिए काम किया है, उनकी आलोचना भले की जाए, लेकिन अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। आंदोलनकारियों को अपना संतुलन बनाए रखना चाहिए और समाज को बंधक बनाने वाला कट्टर रुख छोड़ना चाहिए।

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