गणेशोत्सव के दौरान प्रसाद की शुद्धता और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने नए नियम लागू किए, बड़े और छोटे दोनों मंडलों पर पड़ेगा असर
राहुल गुप्ता
मुंबई, 14 सितंबर।
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में गणेशोत्सव की धूम है। ढोल-नगाड़ों की गूंज और बप्पा के जयकारों के बीच भक्तों को महाप्रसाद का भी बेसब्री से इंतजार रहता है। हालांकि, इस साल गणपति पंडालों में बांटे जाने वाले महाप्रसाद को लेकर व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है।
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी एफडीए ने प्रसाद की गुणवत्ता और साफ-सफाई को लेकर सख्त नियम लागू किए हैं। एफडीए प्रमुख तुकाराम मुंडे के निर्देशों के मुताबिक, अब गणपति मंडल उचित खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन किए बिना महाप्रसाद नहीं बांट सकेंगे।
क्या हैं एफडीए के नए नियम?
एफडीए के ‘फेस्टिवल एनफोर्समेंट कैलेंडर’ के तहत महाप्रसाद की गुणवत्ता और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत मंडलों को प्रसाद तैयार करने से लेकर उसे श्रद्धालुओं तक पहुंचाने तक निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।
नए नियमों के मुताबिक प्रसाद के लिए कच्चा माल या तैयार भोजन केवल रजिस्टर्ड और फूड लाइसेंस प्राप्त सप्लायर्स से ही खरीदा जा सकेगा।
खरीदी गई हर खाद्य सामग्री का पक्का बिल और उसका रिकॉर्ड रखना भी जरूरी होगा। मंडलों को यह जानकारी भी रखनी होगी कि प्रसाद में इस्तेमाल होने वाली प्रत्येक सामग्री कहां से खरीदी गई है।
इसके अलावा प्रसाद बनाने और बांटने वाली जगह पर स्वच्छता के निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन करना होगा।
छोटे मंडलों के लिए बढ़ी चुनौती
एफडीए के नए नियमों का असर बड़े और छोटे दोनों गणपति मंडलों पर पड़ रहा है। बड़े पंडाल आमतौर पर पहले से ही प्रोफेशनल और लाइसेंस प्राप्त कैटरर्स की सेवाएं लेते हैं। ऐसे मंडलों के लिए नए नियमों के तहत अतिरिक्त रिकॉर्ड और कागजी कार्रवाई ही मुख्य बदलाव है।
वहीं, छोटे मंडल चंदे और स्वयंसेवकों की मदद से स्थानीय स्तर पर प्रसाद तैयार करते हैं। ऐसे मंडलों के लिए लाइसेंस प्राप्त सप्लायर से सामग्री खरीदना, बिल और रिकॉर्ड रखना तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करना अतिरिक्त खर्च और व्यवस्था की चुनौती बन सकता है।
जीएसबी मंडल ने पेश की मिसाल
मुंबई का मशहूर जीएसबी गणपति सेवा मंडल हर साल अपने भव्य गणपति उत्सव और महाप्रसाद के लिए जाना जाता है। यहां एक दिन में करीब 40 हजार श्रद्धालु महाप्रसाद ग्रहण करते हैं।
इतने बड़े स्तर पर प्रसाद वितरण के बावजूद जीएसबी मंडल ने एफडीए की गाइडलाइन्स का सख्ती से पालन किया है। मंडल की ओर से नई व्यवस्था के मुताबिक खाद्य सामग्री की खरीद और प्रसाद तैयार करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित किया गया है।
गणेशोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु महाप्रसाद ग्रहण करते हैं। ऐसे में एफडीए की नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य प्रसाद की गुणवत्ता, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
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