बिना निर्धारित प्रक्रिया के मंत्री कार्यालयों में तैनात करीब 550 कर्मचारियों और अधिकारियों की सेवाएं समाप्त, महायुति के तीनों दलों के मंत्री कार्यालय प्रभावित
Rahul Gupta
मुंबई, 12 सितंबर।
महाराष्ट्र में मंत्रियों के कार्यालयों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना तैनात किए गए करीब 550 कर्मचारियों और अधिकारियों को उनके मूल विभागों में वापस भेज दिया गया है। इनमें दूसरे विभागों से अस्थायी तौर पर लिए गए कर्मचारी, बाहरी स्रोतों से काम कर रहे लोग और मौखिक आदेश के आधार पर तैनात कर्मचारी शामिल हैं।
दूसरे विभागों से अस्थायी तौर पर मंत्री कार्यालयों में लाए गए अधिकारियों और कर्मचारियों को ‘उधार पर लिए गए कर्मचारी’ कहा जाता है। बड़ी संख्या में कर्मचारियों की वापसी से कई मंत्री कार्यालयों के कामकाज पर असर पड़ने की स्थिति बन गई है।
मंत्री कार्यालयों में 904 अस्थायी पदों का प्रावधान
नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों के कार्यालयों के लिए अस्थायी पदों का एक निर्धारित ढांचा तैयार किया जाता है। मौजूदा महायुति सरकार ने मंत्री कार्यालयों के लिए कुल 904 अस्थायी पदों का प्रावधान किया था।
मुख्यमंत्री कार्यालय की समीक्षा में सामने आया कि 40 मंत्री कार्यालयों में 549 पद निर्धारित प्रक्रिया के तहत भरे गए थे। इसके अलावा करीब 550 कर्मचारी और अधिकारी अलग-अलग माध्यमों से बिना निर्धारित प्रक्रिया के मंत्री कार्यालयों में काम कर रहे थे।
25 अगस्त को जारी हुआ था आदेश
सामान्य प्रशासन विभाग ने 25 अगस्त को शासनादेश जारी कर ऐसे कर्मचारियों और अधिकारियों को वापस भेजने का निर्देश दिया था, जिनकी नियुक्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत नहीं हुई थी। आदेश में 10 सितंबर तक सभी ऐसे कर्मचारियों को उनके मूल विभाग में भेजने को कहा गया था।
आदेश का पालन नहीं होने की स्थिति में संबंधित कर्मचारियों का वेतन रोकने की चेतावनी भी दी गई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने पूरी प्रक्रिया की निगरानी शुरू की।
मुख्यमंत्री कार्यालय के विशेष कार्यकारी अधिकारी चंद्रशेखर वझे ने विभिन्न मंत्री कार्यालयों से कर्मचारियों की स्थिति की जानकारी ली। समयसीमा खत्म होने के बाद नियमों के अनुसार नियुक्त नहीं किए गए कर्मचारियों को उनके मूल विभागों में वापस भेज दिया गया।
अतिरिक्त स्टाफ पर निर्भर थे मंत्री कार्यालय
मंत्री कार्यालयों में निर्धारित संख्या में उपलब्ध स्टाफ कई प्रशासनिक कामों के लिए पर्याप्त नहीं माना जाता। विधानसभा के सवालों के जवाब तैयार करने, विभागीय मामलों की सुनवाई, फाइलों का निपटारा और निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े कामों के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है।
इसी वजह से कई मंत्रियों ने दूसरे विभागों से अधिकारियों और कर्मचारियों को अस्थायी तौर पर अपने कार्यालयों में तैनात किया था। अब इस व्यवस्था पर रोक लगने के बाद मंत्री कार्यालयों को निर्धारित स्टाफ के जरिए ही अपना कामकाज चलाना होगा।
महायुति के तीनों दलों के मंत्री प्रभावित
करीब 550 कर्मचारियों और अधिकारियों की वापसी का असर महायुति सरकार के तीनों घटक दलों के मंत्री कार्यालयों पर पड़ा है। उपमुख्यमंत्रियों के कार्यालय भी इस कार्रवाई के दायरे में आए हैं।
बताया जा रहा है कि चार मंत्रियों के निजी सचिवों को भी मंत्री कार्यालयों से हटाकर उनके मूल विभागों में वापस भेजना पड़ा है। सरकार के इस फैसले से कई मंत्रियों में नाराजगी की बात सामने आ रही है।
अब मंत्री कार्यालयों में कर्मचारियों और अधिकारियों की नियुक्ति निर्धारित प्रक्रिया और सत्यापन के बाद ही किए जाने की संभावना है। इससे आने वाले समय में मंत्री कार्यालयों में स्टाफ की नियुक्तियों पर मुख्यमंत्री कार्यालय की निगरानी और मजबूत होने के संकेत हैं।
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