एपस्टीन से मुलाकातों पर हरदीप पुरी दें स्पष्टीकरण, रोहिणी खड़से ने उठाए सवाल

एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की महिला प्रदेश अध्यक्ष ने पूछा- केंद्रीय मंत्री का अमेरिकी यौन अपराधी से क्या संबंध था?

न्यूज़म ब्यूरो

मुंबई, 21 अक्टूबर। अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के ईमेल का उल्लेख सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की महिला प्रदेश अध्यक्ष रोहिणी खड़से ने इस मामले को लेकर पुरी से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर केंद्रीय मंत्री और एपस्टीन के बीच किस तरह का संपर्क था और उनकी मुलाकातों का उद्देश्य क्या था।

एपस्टीन से संपर्क को लेकर सवाल

रोहिणी खड़से ने कहा कि एपस्टीन का नाम नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में सामने आया था। ऐसे व्यक्ति से केंद्रीय मंत्री के संपर्क और ईमेल के उल्लेख को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि हरदीप सिंह पुरी एपस्टीन से मिलने किस उद्देश्य से गए थे और उनके बीच किन मुद्दों पर बातचीत हुई थी।

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पुरी ने आरोपों को बताया निराधार

हरदीप सिंह पुरी ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि एपस्टीन से उनकी मुलाकातें पेशेवर सिलसिले में हुई थीं। उन्होंने अपने स्पष्टीकरण में एपस्टीन के आपराधिक कृत्यों से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया है।

नैतिक जिम्मेदारी तय करने की मांग

रोहिणी खड़से ने कहा कि केंद्रीय मंत्री को इस मामले में सामने आए तथ्यों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या पुरी किसी सरकारी प्रतिनिधि के रूप में एपस्टीन से मिलने गए थे या उनकी मुलाकातों का कोई अन्य उद्देश्य था। उन्होंने मांग की कि पुरी इस मामले में अपनी भूमिका स्पष्ट करें और नैतिक जिम्मेदारी निभाएं।

खड़से ने केंद्र सरकार पर बहुमत के बल पर मनमाने ढंग से काम करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि इस तरह के गंभीर मामले में पारदर्शिता जरूरी है और जनता के सामने तथ्यों को स्पष्ट किया जाना चाहिए।

हालांकि, एपस्टीन से संपर्क या ईमेल में नाम का उल्लेख होना अपने आप में किसी आपराधिक गतिविधि में संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। इस मामले में उठाए गए सवालों और आरोपों पर संबंधित दस्तावेजों तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।

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