SIR को लेकर चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
पुणे, 27 सितंबर। महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर वंचित बहुजन आघाड़ी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट प्रकाश आंबेडकर ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि क्या केंद्रीय चुनाव आयोग अब भारत सरकार का चुनाव आयोग बन गया है? आंबेडकर ने SIR की प्रक्रिया, मतदाता सूची से नाम हटाने और संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर चुनाव आयोग से जवाब मांगा।
पहले ही जताई थी 2.90 करोड़ नाम हटने की आशंका
आंबेडकर ने दावा किया कि वंचित बहुजन आघाड़ी ने अप्रैल 2026 में ही आशंका जताई थी कि महाराष्ट्र में SIR के दौरान करीब 2 करोड़ 90 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं और करीब 60 लाख नए नाम जोड़े जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रक्रिया में सामने आए आंकड़ों ने उनकी उस आशंका को फिर चर्चा में ला दिया है।
SIR के दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग
उन्होंने बताया कि SIR की अधिसूचना, चुनाव आयोग और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच हुए पत्राचार तथा कानूनी प्रावधानों को सार्वजनिक करने की मांग को लेकर महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोक्कलिंगम को पत्र दिया गया था। आंबेडकर के अनुसार, इस पत्र का अब तक जवाब नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि इसी मुद्दे को लेकर मुंबई हाईकोर्ट में याचिका भी दाखिल की गई है।
धारा 21(3) का हवाला देकर उठाया कानूनी सवाल
आंबेडकर ने Representation of the People Act की धारा 21(3) का हवाला देते हुए SIR कराने के अधिकार और उसकी प्रक्रिया पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया और नियमों का पालन आवश्यक है। उन्होंने इस मामले में न्यायपालिका की भूमिका को लेकर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का काम नहीं
मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आंबेडकर ने कहा कि किसी व्यक्ति की नागरिकता निर्धारित करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है। उन्होंने कहा कि नागरिकता का फैसला नागरिकता कानून के तहत सक्षम प्राधिकरण द्वारा किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि ‘व्यक्ति यहां नहीं रहता’ या ‘पड़ोसी ने उसे नहीं देखा’ जैसे आधारों पर बड़ी संख्या में नाम हटाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
अंतिम सूची से पहले दावे-आपत्तियों का मौका
महाराष्ट्र में SIR की प्रक्रिया के तहत प्रारूप मतदाता सूची जारी की जा चुकी है। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। ऐसे में आंबेडकर ने प्रक्रिया की पारदर्शिता और सभी संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग दोहराई।
सभी विपक्षी दलों को एकजुट होने का आह्वान
आंबेडकर ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर सभी विपक्षी दलों को एक मंच पर आने की जरूरत बताई। उन्होंने सवाल किया कि केवल एक राजनीतिक दल के नेतृत्व में आंदोलन करने के बजाय सभी विपक्षी दल मिलकर आंदोलन क्यों नहीं करते। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाने की अपील की।
जनता को खुद आगे आना होगा
देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए आंबेडकर ने सत्ता और निर्णय प्रक्रिया में कॉरपोरेट क्षेत्र के बढ़ते प्रभाव का दावा किया। उन्होंने जनता से आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि आंदोलन किस पार्टी ने शुरू किया है, यह देखने के बजाय उसके मुद्दों और सफलता पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने देश की एकता और संप्रभुता की रक्षा के लिए नागरिकों से स्वयं आगे आने का आह्वान किया।
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