मुंबई, 27 सितंबर। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक एवं नेता रोहित पवार ने महाराष्ट्र की मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि लोकसभा चुनाव की तुलना में विधानसभा चुनाव में करीब 71 लाख अधिक मतदान हुआ। उन्होंने सवाल किया कि विधानसभा चुनाव से पहले केवल एक महीने में 6.5 लाख मतदाता कैसे बढ़े और ये मतदाता कहां से आए।
रोहित पवार ने पत्रकार परिषद में कहा कि महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं की संख्या में अपेक्षाकृत कम वृद्धि हुई थी, जबकि विधानसभा चुनाव में एक महीने के भीतर करीब 6.5 लाख मतदाताओं की संख्या बढ़ी। उन्होंने इस अंतर पर स्पष्टीकरण की मांग की और कहा कि मतदान के आंकड़ों को लेकर राज्य में ईवीएम को लेकर चर्चा शुरू हुई है।
पिपाणी चुनाव चिन्ह को लेकर भी उठाए सवाल
रोहित पवार ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी ने लोकसभा चुनाव के दौरान ‘पिपाणी’ चुनाव चिन्ह को लेकर निर्वाचन आयोग के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन उस पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उनका दावा है कि चुनाव चिन्ह में समानता के कारण उनके कई उम्मीदवारों को नुकसान हुआ। उन्होंने इस चिन्ह को फ्रीज करने की मांग किए जाने का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर कई विजयी और पराजित उम्मीदवारों के मतदान में एक समान पैटर्न दिखाई देता है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से इन आंकड़ों पर स्पष्टीकरण देने की मांग की।
SIR के आंकड़ों पर भी सवाल
रोहित पवार ने कहा कि महाराष्ट्र में SIR से पहले 9.78 करोड़ मतदाता थे। राज्य के प्रारूप मतदाता सूची के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2.06 करोड़ मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं हो सके हैं। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, इसके पीछे अनुपलब्ध/नहीं मिले मतदाता, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत, अन्य स्थान पर पंजीकृत या डुप्लीकेट तथा अन्य कारण शामिल हैं। यह संख्या अंतिम रूप से हटाए गए मतदाताओं की संख्या नहीं है, क्योंकि दावे और आपत्तियों के बाद सूची में बदलाव संभव है।
रोहित पवार ने दावा किया कि SIR के दौरान कई ऐसे नाम भी सामने आए हैं, जिनके संबंध में उन्होंने आपत्ति जताई थी। उन्होंने खडकवासला विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए मतदाता संख्या और मतदान के आंकड़ों को लेकर सवाल उठाए।
मतदाता सूची में गलत प्रविष्टियों का दावा
रोहित पवार ने पत्रकार परिषद में एक व्यक्ति से वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत कर दावा किया कि संबंधित व्यक्ति को SIR सूची में मृत दर्शाया गया है, जबकि वह जीवित है। इसी तरह उन्होंने कर्जत-जामखेड विधानसभा क्षेत्र के चिंचोली निवासी परशुराम लांडघुले को स्थायी रूप से स्थानांतरित बताए जाने का दावा करते हुए इसे भी मतदाता सूची की प्रक्रिया पर सवाल बताया।
ईवीएम को लेकर आंदोलन की मांग
रोहित पवार ने कहा कि उन्होंने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम से मुलाकात कर इन मुद्दों को उनके सामने रखा था। उन्होंने कहा कि आगामी आंदोलन में ईवीएम हटाने की मांग को भी शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने निर्वाचन आयोग से मतदाता सूची, SIR और मतदान के आंकड़ों को लेकर पारदर्शिता के साथ स्पष्टीकरण देने की मांग की।
उन्होंने पश्चिम बंगाल और बिहार में SIR को लेकर भी उदाहरण दिए और आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों पर निर्वाचन आयोग का पक्ष अलग है और आयोग के अनुसार SIR के तहत प्रारूप सूची से बाहर हुए नाम दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद वापस शामिल किए जा सकते हैं।
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