मालेगांव की फास्ट ट्रैक अदालत ने 11 महीने में सुनाया फैसला। दोषी को अपील के लिए 30 दिन का समय दिया गया, अपहरण और सबूत मिटाने के मामलों में भी सजा सुनाई गई।
राहुल गुप्ता
नासिक, 17 अक्टूबर। महाराष्ट्र के मालेगांव तालुका में साढ़े 4 साल की बच्ची के साथ यौन अत्याचार और हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक अदालत ने आरोपी शेखर उर्फ विजय संजय खैरनार को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। जिला न्यायाधीश-3 कृ. ग. पालदेवार की अदालत ने पीड़ित परिवार को राज्य सरकार की मनोधैर्य योजना के तहत 10 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया। इस मामले की सुनवाई महज 11 महीने में पूरी हुई।
चॉकलेट का लालच देकर किया था अपहरण
अभियोजन के अनुसार, 16 नवंबर 2025 को आरोपी ने मालेगांव तालुका के एक गांव में मंदिर के पास खेल रही 4 साल 3 महीने की बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर अगवा किया था। इसके बाद बच्ची के साथ यौन अत्याचार किया गया और उसकी हत्या कर शव मोबाइल टावर की बाड़ के भीतर फेंक दिया गया। घटना के बाद पूरे महाराष्ट्र में आक्रोश फैल गया था और आरोपी को कड़ी सजा देने की मांग उठी थी।
24 गवाहों के बयान और डीएनए साक्ष्य पेश
इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम को विशेष सरकारी वकील नियुक्त किया गया था। अदालत ने 30 सितंबर 2026 को आरोपी के खिलाफ यौन अत्याचार, हत्या और सबूत नष्ट करने के आरोप साबित होने की बात कही थी।
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 24 गवाहों के बयान दर्ज कराए। अदालत के सामने चिकित्सकीय और फॉरेंसिक जांच, डीएनए साक्ष्य तथा जेल अधिकारियों, मनोचिकित्सक और पुलिस की रिपोर्ट भी पेश की गई।
मृत्युदंड के अलावा आरोपी को अपहरण और सबूत नष्ट करने के मामलों में भी सजा सुनाई गई। इन दोनों आरोपों में उसे 7-7 साल के कठोर कारावास का दंड दिया गया है। आरोपी को फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है।
पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये देने का आदेश
अदालत ने पीड़ित बच्ची के परिवार को मनोधैर्य योजना के तहत 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। पहले मिल चुकी सहायता राशि को घटाकर भुगतान करने का आदेश दिया गया है।
फैसले के बाद उज्ज्वल निकम ने देखी अपनी जिंदगी पर बनी फिल्म
मामले में फैसला आने के बाद विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने मालेगांव के एक सिनेमाघर में अपनी जिंदगी पर आधारित फिल्म ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ का दोपहर का शो देखा। यह फिल्म 16 अक्टूबर को रिलीज हुई थी। निकम ने अदालत के फैसले का स्वागत किया।
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